आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान का नापाक चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है। पाकिस्तान के आतंकवादी न सिर्फ भारत बल्कि अफगानिस्तान में भी दहशत के काम में लिप्त हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि करीब 6,500 पाकिस्तानी आतंकी पड़ोसी देश अफगानिस्तान में सक्रिय हैं और आतंक फैला रहे हैं।
ईयू क्रॉनिकल में छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी आतंकियों की सक्रियता युद्ध से जूझ रहे अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया क्षेत्र की शांति, स्थिरता और सुरक्षा के लिए खतरा है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन अफगानिस्तान की चुनी हुई सरकार और विदेशी सैनिकों से लड़ रहे इन आतंकियों को प्रशिक्षित करते हैं। ये संगठन आतंकियों के लिए सलाहकार के तौर पर काम करते हैं। इन आतंकियों ने तालिबान के सामने अपनी विश्वसनीयता साबित करने की जटिल चुनौती पेश की है।
अफगानिस्तान के लिए पाकिस्तान की महत्वाकांक्षा किसी छिपी नहीं है। उसकी बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठनों को पाल रही हैं। पिछले साल जुलाई में अमेरिका के दौरे पर प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्तान की धरती से आतंकी संगठनों के संचालित होने की बात पहली बार स्वीकार की थी। अमेरिकी सांसदों के सामने इमरान ने कहा था कि 2014 में 150 स्कूली बच्चों के एक आतंकी हमले में मारे जाने के बाद सभी राजनीतिक दलों ने एक नेशनल एक्शन प्लान हस्ताक्षर किया था। हम इस बात पर सहमत हुए थे कि किसी भी आतंकी संगठन को पाकिस्तान के अंदर संचालित करने की मंजूरी नहीं देंगे।