फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के समीक्षा समूह से खराब रेटिंग मिलने की आशंका से पाकिस्तान डरा हुआ है। अब वह एफएटीएफ के बाकी सदस्यों से कूटनीतिक बैठकें कर खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है। खराब रेटिंग मिलने पर उसके एफएटीएफ की काली सूची में जाने की संभावना बढ़ जाएगी। इस सूची में ऐसे देशों को रखा जाता है जो काले धन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई और आतंकी संगठनों की फंडिंग रोकने में दुनिया को सहयोग नहीं देते हैं।
इन हालात में पाक पीएम इमरान खान संयुक्त राष्ट्र आमसभा के दौरान इसी महीने 20 प्रमुख देशों के नेताओं से खुद मिलने की योजना बना रहे हैं। पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति की समीक्षा कर रहे एफएटीएफ के एशिया-प्रशांत संयुक्त समूह की बैठक में शामिल रहे एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उन्हें शक है की पाकिस्तान समूह को जरा भी विश्वास में ले पाया। इससे खराब रेटिंग का डर बढ़ गया है।
बैंकॉक में हुई इस बैठक में पाकिस्तान ने अपनी वित्तीय स्थिति के समस्त आंकड़े व वित्तीय रिपोर्ट लिखित में मुहैया करवाई थी। बैठक में पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठनों की फंडिंग और देश के कोने-कोने से इन संगठनों के खात्मे को लेकर भी इमरान सरकार के कदमों पर चर्चा की गई। 16 देशों के इस समूह में भारत से भी दो सदस्य शामिल हैं।
पाकिस्तान का डर इसलिए क्योंकि...
- 23 अगस्त को कैनबरा में दी गई एपीजी म्यूचुअल इवेल्यूएशन रिपोर्ट में उसे फॉलो-अप लिस्ट में डाला गया है। इसके मायने हैं कि उसकी खराब वित्तीय स्थिति के सुधरने की उम्मीद जताने के बजाय उसे लगातार निगरानी वाले देशों में शामिल किया गया है।
- एफएटीएफ ने पाकिस्तान को जून 2018 में अपनी ग्रे-लिस्ट में डाल दिया था। उसे 15 महीने का समय देकर 27 बिंदुओं के एक्शन प्लान पर काम करने के लिए कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर 15 महीने बाद उसे ग्रे-लिस्ट से ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा, यानी उसे आर्थिक मदद के रास्ते बंद हो जाएंगे।