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Pakistan Economy: तो पाकिस्तान के आगे डिफॉल्ट करने के अलावा कोई और चारा नहीं!

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 02 Jun 2023 03:33 PM IST

सार

विशेषज्ञों ने कहा है कि पाकिस्तान के अंदरूनी हालत पर आईएमएफ की टिप्पणी को लेकर शहबाज शरीफ सरकार ने गैर-जरूरी अति-प्रतिक्रिया दिखाई। ऐसा करते हुए इस बात का ख्याल नहीं रहा कि पाकिस्तान आईएमएफ को नाराज करने की स्थिति में नहीं है...
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शहबाज शरीफ, आईएमएफ - फोटो : अमर उजाला

थिंक टैंक सेंटर फॉर रिजनल एंड ग्लोबल कनेक्टिविटी के निदेशक जीशान सलाहुद्दीन ने कहा है कि आईएमएफ से ऋण नहीं मिलने की स्थिति में पाकिस्तान के लिए किसी और स्रोत से कर्ज हासिल करना लगभग असंभव हो जाएगा। उस स्थिति में डिफॉल्ट से बचना मुश्किल हो जाएगा।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान को श्रीलंका के हालात से सबक लेना चाहिए। पिछले साल श्रीलंका ने डिफॉल्ट किया था। उसका नतीजा वहां भोजन, दवाओं और ईंधन की भारी किल्लत के रूप में सामने आया। ऐसा पाकिस्तान में भी हो सकता है। दूसरी बड़ी समस्या ऊंची महंगाई की है।

अमेरिकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल में पाकिस्तान इनिशिएटिव के निदेशक उजैर यूनुस के मुताबिक वित्तीय मोर्चे पर पाकिस्तान का प्रदर्शन है और आईएमएफ की जैसी अपेक्षाएं हैं, उनके बीच खाई बहुत चौड़ी है। यूनस ने कहा कि आखिरकार पाकिस्तान को आखिरकार अपनी आर्थिक व्यवस्था के ढांचे में बुनियादी बदलाव लाना होगा। सिर्फ उससे ही उसकी समस्याओं का टिकाऊ हल निकल पाएगा। लेकिन फौरी तौर पर उसे आईएमएफ के कर्ज की जरूरत है।

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