कश्मीर मुद्दे को लेकर पाकिस्तान वैश्विक मंच पर लगातार मुंह की खा रहा है। इस मुद्दे के अंतरराष्ट्रीयकरण की हर कोशिश में उसे कूटनीतिक हार का सामना करना पड़ा है। यह दावा यूरोपीय थिंक टैंक यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (इफ्सास) ने किया है। थिंक टैंक ने सीआरएस रिपोर्ट में दावा किया है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के इरादे से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया है।
उसने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मंच पर कई बार उठाने की कोशिश की लेकिन हर बार अकेला पड़ गया। इस कवायद में उसे तुर्की और चीन का साथ जरूर मिला लेकिन इसका खास फायदा नहीं हुआ। कई कोशिशों के बाद भी वैश्विक मंच पर विफल होने से पाकिस्तान की कश्मीर को लेकर हताशापूर्ण कूटनीति तेजी से बेनकाब हुई है।
इमरान ने भी माना वैश्विक मंच पर अकेले पड़े
रिपोर्ट में दावा किया कि पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने इस साल 16 जनवरी को जर्मनी के चैनल को दिए साक्षात्कार में माना था कि कश्मीर मुद्दे पर वह वैश्विक मंच पर अकेले पड़ गए। इमरान ने कश्मीर मुद्दे पर दखल न देने पर दुनिया को अंजाम भुगतने तक की धमकी दे डाली थी। उन्होंने कहा था कि दो एटमी शक्तियां टकराईं तो पूरी दुनिया खामियाजा भुगतेगी। हालांकि इसके बावजूद इमरान को सफलता नहीं मिली।
सीमा पर सेना लगाना एकमात्र पैंतरा
रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान द्वारा सीमा पर सेना की तैनात करना भारत के खिलाफ उसका एक पैंतरा है। इसके अलावा उसके पास कोई विकल्प नहीं है। भारत ने 1972 में स्पष्ट कर दिया था कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और इसमें बाहरी दखल बर्दाश्त नहीं होगा। तब से संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका सहित सभी बड़े देश इस मामले में दखल से बचते हैं। वहीं, पाकिस्तान हमेशा इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिश करता रहा है।