पाकिस्तान में 8 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने रविवार को दावा किया कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के समर्थन के बिना सरकार नहीं बन सकती। पीपीपी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना पाकिस्तान चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
विचारधारा के मामले में पाकिस्तान की अनोखी पार्टी
गिलानी ने मुल्तान में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, 'मैं आपको एक बात बता दूं, पीपीपी के समर्थन के बिना (इस्लामाबाद में) किसी भी पार्टी की सरकार नहीं बन सकती। पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के नेतृत्व वाली पीपीपी पाकिस्तान में एकमात्र पार्टी है, जिसके पास अपनी एक विचारधारा है।
भुट्टो परिवार का बलिदान बेहद अहम
पार्टी ने मानवाधिकारों, संविधान को बनाए रखने, कानून के शासन, महिला सशक्तीकरण और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए जो बलिदान दिया वह सबके सामने है। स्थानीय अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, एशिया में जितना बलिदान भुट्टो परिवार ने दिया उतना किसी और परिवार ने नहीं दिया।
इमरान खान और नवाज शरीफ की पार्टी को मौका मिलने की वकालत
पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) से जुड़े एक बयान में गिलीनी ने कहा, चुनाव में सभी (पार्टियों) के लिए समान अवसर होना चाहिए। किसी को तरजीह नहीं मिलनी चाहिए। गिलानी से पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी- पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) नेता शाह महमूद कुरैशी के नामांकन पत्र खारिज होने के बारे में भी पूछा गया। उन्होंने इस पर टिप्पणी से इनकार कर दिया।
कानूनी टीम पर टिकी सबकी नजरें
उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों पर पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) की तरफ से आपत्तियां उठाई गई हैं। इस पर गिलानी ने कहा, हमारी पार्टी ने अपना रुख साफ कर दिया है। बिलावल भुट्टो भी समान अवसरों की बात वकालत कर रहे हैं। रिटर्निंग अधिकारी ने नामांकन पत्र से जुड़ी आपत्तियां उठाई हैं । हमें देखना होगा कि उनकी कानूनी टीम किस पर काम करेगी।