पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग (ईसीपी) और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का टकराव अब चरम बिंदु पर पहुंच गया है। ईसीपी ने मंगलवार को पीटीआई को प्रतिबंधित चंदा लेने का दोषी ठहरा दिया। इस सिलसिले में ईसीपी ने पीटीआई को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। पीटीआई को पहले से ऐसा ही फैसला आने का अंदेशा था। इमरान खान ने सोमवार को निर्वाचन आयोग के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने का कार्यक्रम घोषित किया था। अब इस मुद्दे पर देश में नए सिरे से अशांति पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।
तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग की तरफ से इस मामले में निर्णय की घोषणा मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान राजा ने की। पीटीईआई के खिलाफ प्रतिबंधित चंदा लेने की शिकायत इस पार्टी के पूर्व नेता अकबर एस. बाबर ने नवंबर 2014 में दर्ज कराई थी। तब से ये मामला लंबित था। पीटीआई के नेताओं ने कहा है कि अब आयोग ने फैसला देने की जो फुर्ती दिखाई है, उसके पीछे सत्ताधारी पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) का हाथ है। पीडीएम नेतृत्व ने आयोग से जल्द फैसला देने की गुहार लगाई थी।
निर्वाचन आयोग इस नतीजे पर पहुंचा है कि पीटीआई ने 35 विदेशी नागरिकों से चंदा लिया। इनमें धनी कारोबारी आरिफ नकवी भी शामिल हैं। इस बारे में इमरान खान ने आयोग को गलत सूचना दी। इस तरह पीटीआई ने पाकिस्तान के संविधान का उल्लंघन किया। अब आयोग ने नोटिस जारी कर पूछा है कि इस पूरे धन को क्यों जब्त नहीं कर लिया जाना चाहिए।
पीटीआई ने कहा है कि उसने सिर्फ विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों से चंदा लिया है। निर्वाचन आयोग का फैसला आने के बाद पार्टी के नेता फव्वाद चौधरी ने कहा- ‘आयोग के सामने यह साबित कर दिया गया था कि पीटीआई ने कोई विदेशी चंदा नहीं लिया। जिन अघोषित खातों का जिक्र आयोग ने किया है, उसका संभवतया पीटीआई अध्यक्ष के कोई संबंध नहीं था।’ उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग अयोग्य और बेईमान है।
इसके पहले सोमवार को इमरान खान ने इस्लामाबाद स्थित ईसीपी के दफ्तर के बाहर बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का एलान किया था। उन्होंने कहा कि चार अगस्त को ये प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर जोर डालने के आयोजित किया जाएगा। इसके पहले बीत हफ्ते भी पीटीआई ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग के दूसरे अधिकारियों के खिलाफ मुहिम छेड़ने का इरादा जताया था।
सोमवार शाम से ही इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। इस्लामाबाद के ‘रेड जोन’ में एक हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है और वहां आम लोगों के आने-जाने पर रोक लगाई दी गई है। सत्ताधारी गठबंधन ने चुनाव आयोग पर दबाव डालने की पीटीआई की रणनीति की कड़ी आलोचना की है। गठबंधन में शामिल दलों ने कहा है कि पीटीआई ने दबाव डाल कर अपने हक में फैसला कराने की कोशिश की, जो अब नाकाम हो गई है।