पाकिस्तान मौजूदा समय में एक बड़े राजनीतिक और आर्थिक संकट की गिरफ्त में है। इसके बावजूद इस वर्ष के अंत में निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से चुनाव आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब तक की गई व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में चुनाव निकाय की बैठक के साथ आम चुनावों की तैयारी शुरू हो गई है।
वर्तमान नेशनल असेंबली का कार्यकाल 12 अगस्त को होगा पूरा
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान राजा को सोमवार को पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) के अधिकारियों ने चुनाव से संबंधित जानकारी दी। पाकिस्तान चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जिसे देश में चुनाव आयोजित करने का काम सौंपा गया है। वर्तमान नेशनल असेंबली 12 अगस्त को अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी और पाकिस्तान के संविधान में निर्धारित 60 दिनों के भीतर नए आम चुनाव कराए जाने का प्रावधान है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजा को आगामी आम चुनावों की तैयारियों और अब तक की गई व्यवस्थाओं के बारे में बताया गया। इससे पता चलता है कि ईसीपी ने निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से चुनाव आयोजित करने के लिए कई प्रारंभिक उपाय किए हैं। सीईसी को बताया गया कि मतपत्र के लिए जरूरी चुनाव सामग्री और कागज खरीद लिए गए हैं और मतदान केंद्रों की सूची तैयार कर ली गई है।
ईसीपी ने चुनाव के लिए मतदाता सूची में मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और सत्यापन की अंतिम तिथि के लिए 13 जुलाई की घोषणा पहले ही कर दी है और उसने नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए पहले से ही जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। आम चुनावों के साथ-साथ चार प्रांतीय विधानसभाओं के लिए भी चुनाव होंगे। गौरतलब है कि पंजाब और खैबर-पख्तूनख्वा की विधानसभाओं को जनवरी में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख इमरान खान ने जल्दी चुनाव कराने के लिए भंग कर दिया था।
यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब इमरान खान अपनी पार्टी के लोगों को एकसाथ रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नौ मई को अर्धसैनिक बलों द्वारा उनकी गिरफ्तारी के बाद व्यापक हिंसा के बाद 100 से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने उनकी पार्टी छोड़ दी है। खान 140 से अधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर मामले आतंकवाद, जनता को हिंसा के लिए उकसाने, आगजनी, ईशनिंदा, हत्या के प्रयास, भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से संबंधित हैं। चुनाव की तैयारी ऐसे समय में हो रही है जब नकदी की तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान भारी विदेशी कर्ज, कमजोर स्थानीय मुद्रा और घटते विदेशी मुद्रा भंडार से जूझ रहा है।