पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने चेतावनी दी है कि हालात ऐसे ही रहे तो देश का मासिक तेल आयात बिल 600 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं पेट्रोलियम मंत्री ने संकेत दिया कि बढ़ती कीमतों से राहत के लिए पाकिस्तान आईएमएफ से पेट्रोलियम लेवी में छूट मांग सकता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर अब पाकिस्तान की पहले से लचर अर्थव्यवस्था पर और भारी पड़ता दिख रहा है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को अब तेल की महंगी कीमतों की नई मार झेलनी पड़ सकती है। इस बात की चेतावनी खुद पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने दी। उन्होंने बताया कि मौजूदा हालात जारी रहे तो देश का मासिक तेल आयात बिल करीब 600 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। कर्ज और महंगाई से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह स्थिति दोहरी आर्थिक चुनौती बनती जा रही है।
पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई है, जो लगभग 20% की बढ़ोतरी है।
नई कीमतों के बाद पेट्रोल 321.17 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल 335.86 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
आम पाकिस्तानी जनता पर बढ़ा बोझ
गौरतलब है कि तेल की कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी से पाकिस्तान में आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। खासकर रमजान के दौरान पहले से ही महंगाई से जूझ रहे लोगों पर इसका बड़ा असर पड़ रहा है। यात्री, मजदूर और आम नागरिकों का कहना है कि पेट्रोल महंगा होने से रोजमर्रा का खर्च संभालना और कठिन हो गया है। दूसरी ओर विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से महंगाई की दूसरी लहर आ सकती है। क्योंकि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन और सामान ढुलाई की लागत बढ़ जाती है, जिससे खाने-पीने की चीजों और जरूरी सामान की कीमतें भी बढ़ जाती हैं।