पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-प्रतिदिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। ऐसे में उग्र होते हालात के बीच इसका बड़ा प्रभाव तेल की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। इसी बीच बढ़ते तेल की कीमतों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आ रहा है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर एक पोस्ट में कहा कि अगर ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए कुछ समय के लिए तेल की कीमतें बढ़ भी जाती हैं, तो यह दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए बहुत छोटी कीमत होगी। ट्रंप ने यह भी लिखा कि जब ईरान के परमाणु खतरे को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा, तब तेल की कीमतें जल्दी ही गिर जाएंगी। अभी अगर थोड़े समय के लिए तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो यह अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा के लिए एक छोटी सी कीमत है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इससे अलग सोचते हैं, वे मूर्ख हैं।
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100 डॉलर के पार पहुंचा तेल
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। यह साल 2022 में हुए रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार है जब कीमत इतनी ऊपर पहुंची है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और ईरान से जुड़े तनाव के कारण निवेशकों को डर है कि दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
कच्चे तेल के दाम में भारी बढ़ोतरी
इतना ही नहीं अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत लगभग 18% बढ़कर करीब 108 डॉलर प्रति बैरल हो गई। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी करीब 16% बढ़कर लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों के इस संघर्ष में शामिल होने और वहां तेल रिफाइनरियों पर हमलों की खबरों के बाद बाजार में चिंता और बढ़ गई है।
शेयर बाजार पर भी बड़ा असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के चलते तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब शेयर बाजार पर भी पड़ता दिख रहा है। डॉव फ्यूचर्स में 800 से ज्यादा अंकों यानी करीब 1.7% की गिरावट आई। एसएंडपी 500 और नैस्डैक फ्यूचर्स भी करीब 1.6% तक नीचे चले गए। इसका कारण है कि निवेशकों को डर है कि अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहा तो महंगाई फिर बढ़ सकती है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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अमेरिका में पेट्रोल भी महंगा
ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद अमेरिका में पेट्रोल की कीमत भी तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 3.45 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो पिछले हफ्ते की तुलना में करीब 16% ज्यादा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल और गैस की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो अमेरिका में आम लोगों के लिए खर्च बढ़ जाएगा। इसका असर राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पार्टी की राजनीति पर भी पड़ सकता है, खासकर इस साल होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले।