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Pakistan: कितनी डूब चुकी है की पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, नए बजट ने खोला राज

Sun, 11 Jun 2023 02:42 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

आलोचकों ने इस बात पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है कि शहबाज शरीफ सरकार ने आर्थिक बदहाली के लिए अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय इसका दोष अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष पर डालने की कोशिश की है।
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पाकिस्तान में आर्थिक संकट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पाकिस्तान में अगले वित्त वर्ष के लिए पेश हुआ आम बजट दरअसल देश की घोर आर्थिक बदहाली को सामने लाने वाला दस्तावेज बन गया है। पाकिस्तान किस मुसीबत में फंस गया है, इसके आंकड़े इस बजट से सामने आए हैं। अब खुद पाकिस्तान सरकार ने स्वीकार किया है कि देश स्टैगफ्लेशन (आर्थिक वृद्धि दर से अधिक मुद्रास्फीति दर) की गहरी खाई में गिर चुका है। चालू वित्त वर्ष में जहां आर्थिक वृद्धि दर महज 0.3 प्रतिशत रही, वहीं देश में मुद्रास्फीति की दर औसतन 38 प्रतिशत रही।
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आलोचकों ने इस बात पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है कि शहबाज शरीफ सरकार ने आर्थिक बदहाली के लिए अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय इसका दोष अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष पर डालने की कोशिश की है। वित्त मंत्री इशहाक डार ने कहा कि मंजूर हो चुके ऋण जारी करने को लेकर आईएमएफ ने जो टाल-मटोल की, उसका पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर बहुत खराब प्रभाव पड़ा। डार ने कहा कि आईएमएफ का कर्ज ना मिलने की स्थिति में पाकिस्तान सरकार के पास एक ‘प्लान-बी’ (वैकल्पिक योजना) है, लेकिन अपने लंबे बजट भाषण के दौरान उन्होंने इसका कोई ब्योरा नहीं दिया। इसको लेकर भी कई हलकों से उनकी आलोचना हुई है।

सरकार ने स्वीकार किया है कि निम्न आर्थिक वृद्धि के कारण देश में बेरोजगारी और गरीबी में भारी इजाफा हुआ है। उस समय बेरोजगारी भी बढ़ती जा रही है, जब लोगों को 38 प्रतिशत की ऊंची महंगाई दर का सामना करना पड़ रहा है। बजट दस्तावेज से सामने आया कि सरकार आर्थिक लक्ष्यों के सभी मोर्चों पर नाकाम रही। अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपने एक विश्लेषण में कहा है- ‘चालू वित्त वर्ष पाकिस्तान के इतिहास में एक ऐसे साल के रूप में दर्ज होगा, जब देश को विनाशकारी बाढ़ का सामना करना पड़ा जिससे फसलें बह गईं, उसकी अर्थव्यवस्था का घोर कुप्रबंधन हुआ और बेकाबू महंगाई के कारण लोगों की क्रय शक्ति में तेजी से गिरावट आई।’
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एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अर्थशास्त्रियों में मौजूद इस राय का जिक्र किया है कि (पाकिस्तानी) रुपये के अवमूल्यन अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उधर सरकार ने आईएमएफ से कर्ज पाने की कोशिश में आम उपभोग की चीजों के दाम तेजी से बढ़ाए। लेकिन आखिर में मौजूदा सरकार ना तो आईएमएफ से ऋण हासिल कर पाई और ना ही अर्थव्यवस्था को विनाश से बचा पाई।

बजट से सामने आई सूचना के मुताबिक आयात और उपभोग पर लगी भारी रोक के कारण आर्थिक वृद्धि दर में बड़ी गिरावट आई। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि पिछले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रही थी। तब देश में इमरान खान की सरकार थी। इसलिए अब इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने दावा किया है कि उसकी सरकार का आर्थिक प्रबंधन दुरुस्त था। जबकि मौजूदा सरकार अर्थव्यवस्था को संभालने में पूरी तरह नाकाम रही है। इसकी जिम्मेदारी सत्ताधारी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) में शामिल सभी 13 पार्टियों पर आती है।
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आर्थिक बदहाली के बावजूद सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का एलान किया है। यह भी आलोचना का विषय बना है।
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