पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी
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18 साल से युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में भारत की भूमिका को जहां अमेरिका समेत पूरी दुनिया में सराहा गया है वहीं पाकिस्तान को ये नजदीकियां खटक रही हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सीनेट को बताया है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान में भारत की किसी भी सुरक्षा भूमिका के खिलाफ है और वह इसका विरोध करेगा। कुरैशी ने कहा, भारत ने यहां बिगाड़ने वाली भूमिका निभाई है।
बता दें कि अमेरिका के बुलावे पर भारत ने कतर में तालिबान के साथ शांति वार्ता में गवाह की भूमिका भी निभाई थी। पाक को यह सब अच्छा नहीं लग रहा है। कुरैशी ने जहर उगलते हुए कहा कि भारत, अफगानिस्तान के अंदर और बाहर दोनों जगह अपने मकसद को पूरा करना चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान नहीं चाहता कि अफगानिस्तान में अलकायदा और आईएस की मौजूदगी रहे।
कुरैशी ने कहा कि अफगानिस्तान में भारत की भूमिका एक विघ्नकर्ता वाली है। भारत पहले भी इसी भूमिका में रहा है क्योंकि वह शुरू से यहां पर सबसे बड़ा हितग्राही रहा है। उसने युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में पुनर्निर्माण के लिए दो अरब डॉलर भी खर्च किए हैं। कुरैशी ने यहां तक कहा कि कोई भी देश अफगानिस्तान में सुरक्षा को लेकर भारत की भूमिका को स्वीकार नहीं करेगा।
द्विपक्षीय वार्ता का विकल्प
काबुल में अमेरिका और अफगान सरकार द्वारा जारी संयुक्त घोषणा के बारे बात करते हुए पाक विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान सभी मुद्दों पर अफगानिस्तान के साथ द्विपक्षीय रूप से विवादों का हल निकालना चाहता है। कुरैशी ने कहा कि कोई तीसरा देश हमारे लिए कोई रास्ता नहीं निकाल सकता है। कुरैशी ने द्विपक्षीय वार्ता को ही अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का पसंदीदा विकल्प बताया।
शांति की गारंटी नहीं दे सकते
पाक विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान न तो अफगानिस्तान में शांति की गारंटी नहीं दे सकता है और न ही जिम्मेदारी ले सकता है। कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान कभी भी शांति वार्ता का हिस्सा नहीं था और उसकी भूमिका हमेशा एक सूत्रधार की रही है और हमेशा रहेगी। उन्होंने कहा कि यह एक साझा जिम्मेदारी है और सभी (हितधारकों) को अपनी भूमिका निभानी होगी। इसमें कई शक्तियां, रुचियां और उद्देश्य शामिल हैं।