पाकिस्तान में बदतर हो रहे आर्थिक हालात के बीच अब सवाल उठाया जा रहा है कि इस अभूतपूर्व संकट के समय आखिर कोई मित्र देश पाकिस्तान की सहायता के लिए आगे क्यों नहीं आया है? हालांकि अभी इस सवाल को लेकर विपक्ष ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार पर हमला किया है, लेकिन पाकिस्तान के अलग-थलग पड़ जाने के मुद्दे पर देश के अंदर गहरी व्यग्रता देखने को मिल रही है।
विपक्षी पार्टी अवामी मुस्लिम लीग के नेता शेख राशिद अहमद ने शहबाज शरीफ सरकार आर्थिक मुश्किलों से निपटने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा- ‘न तो चीन, न दुबई, न कतर और न ही सऊदी अरब पाकिस्तान की मदद के लिए आगे आया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का बेलआउट पैकेज भी अभी तक पाकिस्तान नहीं पहुंचा है।’ अवामी मुस्लिम लीग पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ का सहयोगी दल है। शेख राशिद पूर्व इमरान खान सरकार में गृह मंत्री थे।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक आर्थिक संकट से राहत दिलाने में नाकामी के कारण शहबाज शरीफ सरकार की साख तेजी खत्म हो रही है। आईएमएफ से छह बिलियन डॉलर का बेलआउट पैकेज हासिल करने की कोशिश में शरीफ सरकार ने आईएमएफ की सख्त शर्तों को लागू किया है। उससे देश के लोगों की परेशानी बढ़ी है। इसके बावजूद आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए कर्ज की नई किस्त जारी नहीं की है। इस बीच पाकिस्तानी रुपये की कीमत में गिरावट का रोज नया रिकॉर्ड बन रहा है। सरकार ने कहा है कि आईएमएफ का पैकेज आने के बाद रुपये की कीमत संभलेगी। लेकिन पैकेज कब आएगा, इस बारे में अब तक कोई स्पष्टता नहीं है।
हालात बिगड़ते देख बीते हफ्ते पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने पहल अपने हाथ में ली। उन्होंने अमेरिका की विदेश उप मंत्री वेंडी शरमन से फोन पर बात की। जनरल बाजवा ने अमेरिका से गुजारिश की कि वह पाकिस्तान के लिए कर्ज की रकम जारी करवाने में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे। पाकिस्तान सरकार के साथ हुए समझौते के तहत आईएमएफ कर्ज की पहली किस्त के रूप में 1.2 बिलियन डॉलर जारी करने पर राजी हुआ था। लेकिन समझा जाता है कि पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने के संकेतों के बीच उसने इसमें देर करने का फैसला किया है।
बताया जाता है कि इस पहल के पहले जनरल बाजवा की देश की आर्थिक हालत को लेकर कई बार प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बातचीत हुई थी। इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने जनरल बाजवा की इस पहल की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि आईएमएफ से कर्ज दिलवाने के लिए अमेरिका से संपर्क करना सेनाध्यक्ष का काम नहीं है। उन्होंने कहा कि यह देश के लगातार कमजोर होते जाने का संकेत है।
इस बीच अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि शहबाज शरीफ सरकार ने भी इस्लामाबाद स्थित अमेरिका के सर्वोच्च राजनयिक से संपर्क कर मदद मांगी है। बताया जाता है कि शरीफ सरकार ने अमेरिकी राजनयिक से गुजारिश की कि वे विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक से पाकिस्तान को 1.4 बिलियन डॉलर की सहायता दिलाने में मदद करें।