दुनिया के दो मोस्ट वांटेड आतंकवादी, अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन और ‘अयमान अल-जवाहिरी, अब मारे जा चुके हैं। अमेरिका ने इन दोनों को मार गिराया। इन आतंकियों को मार गिराने वाला 'ऑपरेशन' आसान नहीं था। ये दोनों ही ऑपरेशन जोखिम से भरे थे। पहला, ऑपरेशन की सूचना लीक न हो। दूसरा, उसमें स्थानीय लोगों का कम से कम नुकसान हो, इसका खास ध्यान रखा गया। साल 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में अमेरिकी सेना के छह हेलीकॉप्टरों वाले दल ने ओसामा बिन लादेन को मार दिया था।
लादेन को मारने के लिए अमेरिका ने पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े लोगों की मदद ली थी। 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में दुनिया का सबसे खतरनाक चरमपंथी हमला हुआ था। उस हमले के बाद से ही अमेरिका, ओसामा बिन लादेन और अल-जवाहिरी जैसे आतंकियों की तलाश में जुटा था। साल 2011 में लादेन को मार दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि पाकिस्तान के दो प्रधानमंत्री, ओसामा बिन लादेन के संपर्क में रहे थे। इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस (आईएसआई) के पूर्व जासूस खालिद ख्वाजा की पत्नी शमामा खालिद की एक किताब 'खालिद ख्वाजा: शहीद-ए-अमन' में भी इसका जिक्र हुआ था। उस किताब में यह दावा किया गया था कि पीएम नवाज शरीफ ने कश्मीर और अफगानिस्तान में जिहाद को बढ़ावा देने के लिए ओसामा बिन लादेन से 1.5 अरब रुपये लिए थे। एक प्रधानमंत्री ने लादेन से रुपये ले लिए, तो दूसरे प्रधानमंत्री ने अमेरिका को 'लादेन' की सूचना लीक कर उसे खत्म करा दिया।
इमरान खान की पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (पीटीआई) ने सत्ता में आने से पहले कहा था कि तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ ने कथित तौर पर अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन से डेढ़ अरब रुपये लिए थे। पार्टी का कहना था कि अगर वह सत्ता में आती है तो ओसामा बिन लादेन से धन लेने के मामले में नवाज शरीफ के खिलाफ केस दर्ज करेगी। पीटीआई के प्रवक्ता फवाद चौधरी ने भी सार्वजनिक तौर पर यह बयान दिया था कि पाकिस्तान में लोकतंत्र के खिलाफ साजिश हो रही है। आतंकी से धन लिया जा रहा है। साल 2019 में पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान यह खुलासा किया था कि लादेन के ठिकाने की सूचना लीक की गई थी। पाकिस्तान ने ही अमेरिका को वह जानकारी दी थी। अमेरिकी सील कमांडोज की एक पॉकेट गाइड, जो लादेन के ठिकाने से बरामद हुई थी, उसमें भी ऐसी जानकारी लिखी थी। पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहमान मलिक भी ऐसा संकेत दे चुके हैं कि घर के किसी भेदिये ने ओसामा बिन लादेन को धोखा दिया था।
अमेरिकी प्रशासन द्वारा मीडिया को दी गई जानकारी के मुताबिक, जवाहिरी की तलाश का काम लंबे समय से चल रहा था। यह काम बहुत सावधानीपूर्वक और धैर्य से किया गया। लादेन के बाद आतंकी संगठन अल-कायदा को जवाहिरी ही लीड कर रहा था। अमेरिकी एजेंसियों ने पुख्ता सूत्रों के जरिए यह पता लगा लिया था कि जवाहिरी और उसका परिवार कहां रहता है। अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आने के बाद जवाहिरी की पत्नी, उसकी बेटी और बच्चे, काबुल स्थित एक सुरक्षित घर में शिफ्ट हो गए थे। यह 'ऑपरेशन' लादेन पर हुए हमले से अलग था। लादेन, पाकिस्तान में छिपा था। पाकिस्तान पर अमेरिकी दबाव था। कहीं कोई बात बिगड़ती तो मामला सुलझने की उम्मीद थी। हालांकि तब भी अमेरिकी सील कमांडो, एक भय के साथ एबटाबाद में उतरे थे। पाकिस्तान के पास वायु सेना और मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम था। अगर वह 'ऑपरेशन' लीक हो जाता, तो स्थिति बिगड़ सकती थी। अमेरिकी एजेंसियों ने लगातार जवाहिरी के ठिकाने पर नजर रखी। इसमें मानवीय इंटेलिजेंस की मदद ली गई। अप्रैल में यह जानकारी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के पास पहुंचना शुरू हो गई थी। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन के जरिए राष्ट्रपति जो बाइडन तक जवाहिरी की सूचना पहुंचाई गई।
राष्ट्रपति बाइडन ने खुफिया जानकारी को परखने और उसके आधार पर कार्रवाई के लिए प्रमुख सलाहकारों एवं कैबिनेट सदस्यों के साथ बैठक की। औपचारिक तौर से पहली जुलाई को, राष्ट्रपति बाइडन को प्रस्तावित ऑपरेशन के बारे में बताया गया। बाइडन ने यहां पर कहा, आसपास के लोगों को कोई जोखिम न होने पाए। बाइडन को बाकायदा 'ऑपरेशन' की सारी प्लानिंग समझाई गई। अगर ये 'ऑपरेशन' सफल नहीं रहता है तो तालिबान के साथ अमेरिका के संबंध प्रभावित हो सकते हैं। जो बाइडन ने इसी शर्त पर हवाई हमले के लिए अधिकृत किया कि इसमें नागरिकों के हताहत होने की संख्या कम से कम रहे। जहां पर जवाहिरी रहता था, वह शेरपुर एक शांत क्षेत्र माना जाता है। यहां पूर्व अफगान जनरल और जातीय उज्बेक अब्दुल रशीद दोस्तम सहित कई बड़े लोग रहते हैं।
ओसामा बिन लादेन के मामले में भी यही पॉलिसी अपनाई गई। नेवी सील अफसर रॉबर्ट ओ नील द्वारा अपनी किताब 'द ऑपरेटर' में कई तरह के खुलासे किए गए हैं। लादेन को मारने वाले दल में छह हेलीकॉप्टर थे। इनमें से दो स्टैंडबाई पॉजिशन में थे। दो हेलीकॉप्टर, दल के पीछे थे। यह अतिरिक्त सुरक्षा इसलिए प्रदान की गई, क्योंकि पाकिस्तान के पास मॉडर्न एयर डिफेंस सिस्टम था। उससे सील कमांडो के दल को खतरा हो सकता था। दल में शामिल एक हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल केवल ईंधन के लिए किया गया। लादेन की मौत के दौरान भी आसपास के इलाके में कोई जान माल की हानि नहीं हुई थी। दूसरी मंजिल पर बैठे ओसामा बिन लादेन को मार गिराया गया। हालांकि इस कार्रवाई में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।