पाकिस्तान की एक अदालत ने गुरुवार को करोड़ों डॉलर के धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में पीएम शहबाज शरीफ को राहत देते हुए परिवार समेत बरी कर दिया। भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी शहबाज के खिलाफ अदालत के समक्ष कोई ठोस सबूत देने में विफल रही। साथ ही अदालत ने शहबाज शरीफ को नुसरत शहबाज (पत्नी), हमजा (बेटा) जवेरिया अली (बेटी), मुहम्मद उस्मान, मसरूर अनवर, शोएब कमर, कासिम कय्यूम, राशिद करामत, अली अहमद और निसार अहमद सहित सभी सह-आरोपियों के साथ बरी कर दिया।
शहबाज की दूसरी बेटी राबिया भगोड़ा घोषित
अदालत के एक अधिकारी ने कहा कि अदालत ने प्रधानमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों को बरी कर दिया क्योंकि एनएबी विदेशों में, खासकर यूनाइटेड किंगडम में लाखों डॉलर की हेराफेरी के संबंध में संदिग्धों के खिलाफ कोई ठोस सबूत देने में विफल रही। अधिकारी ने आगे कहा कि अदालत ने प्रधानमंत्री की एक और बेटी राबिया इमरान को भगोड़ा घोषित कर दिया और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। मामले में नाम आने के बाद से राबिया ब्रिटेन चली गई थी।
इमरान खान के कार्यकाल में दर्ज हुआ था मुकदमा
एनएबी द्वारा 2020 में इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था। वहीं शरीफ परिवार ने इस मामले को राजनीतिक उत्पीड़न करार दिया था। पिछले साल अक्तूबर में संघीय जांच एजेंसी की एक विशेष अदालत ने शहबाज को 16 बिलियन पाकिस्तानी रुपया के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी बरी कर दिया था। 10 जुलाई को उनके बेटे सुलेमान शाहबाज को भी इसी मामले में बरी कर दिया गया था।
जावेद बाजवा पर लगाए आरोप
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के वरिष्ठ नेता बैरिस्टर एतजाज अहसन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और सैन्य प्रतिष्ठान ने शरीफ परिवार को उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में सजा से बचाया था। अहसान ने कहा कि बाजवा साहब ने शरीफ परिवार को मामलों में सजा से बचाया है और उन्होंने एक बड़ा अपराध किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज, उनके बड़े भाई पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और मरियम नवाज शरीफ के खिलाफ मामले खुले और बंद थे और उनकी सजा स्पष्ट थी लेकिन शीर्ष व्यक्ति ने उन्हें बचा लिया।