पाकिस्तान वैसे तो पूरी दुनिया के सामने पीओके के स्वतंत्र क्षेत्र होने का दावा करता है लेकिन सच्चाई यह है कि यह इलाका पाक सेना के कब्जे में है। पीओके के नागरिकों ने कई बार इस्लामाबाद के विरुद्ध आवाज उठाने की कोशिश की लेकिन पाकिस्तानी फौज उन्हें कुचलती रही है। सच्चाई यह है कि पाक विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता का यह बयान भी दुनिया की नजरों में धूल झोंकने के लिए है।
पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली का सीधा असर देश की उच्च शिक्षा पर पड़ रहा है। देश के अधिकतर विश्वविद्यालय धन की कमी से जूझ रहे हैं। पाक अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने ऑल पाकिस्तान यूनिवर्सिटी एकेडमिक एसोसिएशन (एपीयूएए) के हवाले से कहा है कि पिछले एक साल में उच्च शिक्षा संस्थानों ने जितने धन की मांग की, उसका आधा बजट ही सरकार ने मुहैया कराया है।
एपीयूएए के अध्यक्ष डॉ. सोहेल यूसुफ ने पुष्टि की कि बीते साल की तुलना में इस साल सरकार ने बजट और कम कर दिया है। उच्च शिक्षा आयोग के समाज विज्ञान परियोजना प्रबंधक मुर्तजा नूर ने कहा, मौजूदा दौर में पाकिस्तानी विश्वविद्यालयों की जो हालत है उतनी बुरी इससे पहले कभी नहीं रही है। उन्होंने बताया कि सरकार से वेतन, शोध व प्रयोगशालाओं के लिए 103 अरब रुपये मांगे गए थे लेकिन मिले सिर्फ 59 अरब रुपये।