सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा का सेवा विस्तार तीन साल से घटाकर छह महीने करने वाले पाकिस्तान के चीफ जस्टिस आसिफ खोसा का शुक्रवार को दर्द छलक गया। उन्होंने अपने और न्यायपालिका के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाए जाने का आरोप लगाया। वह शुक्रवार आधी रात सेवानिवृत्त हो गए।
चीफ जस्टिस खोसा (64) का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान की विशेष अदालत ने पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ को देशद्रोह और देश में इमरजेंसी लगाए जाने के मामले में मौत की सजा सुनाई है। सजा सुनाने वाली विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को कहा था कि यदि फांसी दिए जाने से पहले मुशर्रफ की मौत हो जाती है तो उनके शव को इस्लामाबाद के सेंट्रल स्क्वायर पर खींचकर लाया जाए और तीन दिन तक लटकाया जाए।
इसके बाद न्यायपालिका की चौतरफा आलोचना शुरू हो गई है। अपने विदाई समारोह के लिए आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान चीफ जस्टिस खोसा ने कहा, ‘मैंने निष्पक्षता और अपने विवेक के आधार पर फैसले सुनाए हैं।
बावजूद इसके मेरे और न्यायपालिका के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान शुरू किया गया है। जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं वो निराधार और गलत हैं। अदालत को अपनी शक्तियों की सीमा पता है।