मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश खोसा ने एक तरह से सरकार और खासकर प्रधानमंत्री इमरान खान के न्यायपालिका की आलोचना करने को लेकर तंज किया। अपना फैसला पढ़ने से पहले खोसा ने कहा कि हम जब भी संवैधानिक या कानूनी बारीकियों में जाते हैं, तो कहा जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के जज अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के एजेंट हैं।
जजों को भारत का एजेंट या जासूस तक करार दिया जाता है। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश खोसा ने अटॉर्नी जनरल मंसूर को फटकार लगाते हुए कहा कि आपकी गैरजिम्मेदारी की वजह से सेना प्रमुख को यह सब झेलना पड़ा।
वो इन छोटे-छोटे मामलों को देखेंगे या सरहद पर देश की सुरक्षा करेंगे? आखिर सरकार हमें दोषी क्यों ठहराना चाहती है, क्या हम आपकी गलतियों को नहीं पकड़ेंगे। खोसा ने यह टिप्पणी अटॉर्नी जनरल के उस तर्क के जवाब में की जिसमें उन्होंने कहा था कि सेना प्रमुख के कार्यकाल के विस्तार को लेकर उठे विवाद का फायदा भारत उठा सकता है।