Anti Terrorism Act: पाकिस्तान की कैबिनेट ने गुरुवार को चरमपंथी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) पार्टी पर आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत प्रतिबंध लगाने के फैसले को मंजूरी दे दी, क्योंकि इसने हाल ही में देश में हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था। जानें टीएलपी पर क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं...
पाकिस्तान की सरकार ने कट्टरपंथी धार्मिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) पर एक बार फिर पाबंदी लगाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। यह कार्रवाई आतंकवाद निरोधक कानून के तहत की गई है।
2021 के बाद दोबारा लगा प्रतिबंध
सरकार का कहना है कि टीएलपी ने देशभर में कई बार हिंसक प्रदर्शन किए हैं, जिसमें आम लोग और पुलिसकर्मी मारे गए हैं। इस संगठन को साल 2021 में भी प्रतिबंधित किया गया था, लेकिन छह महीने बाद यह शर्त पर बैन हटा लिया गया था कि आगे हिंसा नहीं होगी। अब दोबारा बैन इसलिए लगाया गया क्योंकि टीएलपी ने वादे तोड़े और फिर से हिंसा भड़काई।
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मार्च के दौरान हुई झड़प में 16 की मौत
हाल ही में टीएलपी ने 'गाजा एकजुटता मार्च' निकाला था, जो बाद में पुलिस से झड़प में बदल गया। लाहौर के पास मुरिदके इलाके में हुई हिंसा में 16 लोगों की मौत और 1600 से ज्यादा लोग घायल हुए। पुलिस ने अब तक करीब 6000 टीएलपी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है और 61 धार्मिक संस्थान सील कर दिए हैं।
107 टीएलपी समर्थकों को किया गया गिरफ्तार
सरकार ने 3600 ऐसे लोगों की पहचान भी की है जो इस संगठन को आर्थिक मदद देते थे, इनमें विदेशों में बैठे लोग भी शामिल हैं। इसके अलावा, साइबर अपराध एजेंसी ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने के आरोप में 107 टीएलपी समर्थकों को गिरफ्तार किया है और 75 अकाउंट बंद कर दिए हैं। अब सरकार यह मामला सुप्रीम कोर्ट के पास भेजेगी ताकि अदालत से भी इस प्रतिबंध की मंजूरी मिल सके। इसके बाद टीएलपी को पाकिस्तान के प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल कर दिया जाएगा।