फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कट्टरपंथियों की धमकी दरकिनार कर पाक की सड़कों पर उतरीं हजारों महिलाएं 

Sun, 08 Mar 2020 08:48 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

  • तमाम शहरों में 'औरत मार्च' के दौरान महिलाओं ने दिखाया दम 
  • इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की कट्टरपंथियों की याचिका
  • पाक विदेश मंत्रालय ने कश्मीर में महिलाओं पर जुल्म का राग अलापा
विज्ञापन
Aurat March in Pakistan - फोटो : Twitter
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अपने हकों और आजादी की मांग को लेकर हजारों महिलाएं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर पाकिस्तान की सड़कों पर उतरीं। कट्टरपंथियों के जबरदस्त विरोध के बावजूद इस बार पाकिस्तान के कई शहरों में 'औरत मार्च' के जरिए महिलाओं ने मजबूती से अपनी मांग रखी। उन्होंने हर क्षेत्र में महिलाओं को आगे लाने और अपने प्रति दकियानूसी नजरिया बदलने की बात उठाई।

विज्ञापन


दो दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की विशेष सलाहकार और सूचना प्रसारण मंत्री डॉ फिरदौस आशिक अवान ने इस मार्च पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि सरकार पहले से ही महिलाओं की आजादी और अधिकारों को लेकर प्रतिबद्ध है। इसके लिए सड़कों पर उतरकर नारे लगाने की जरूरत नहीं है। सड़कों पर उतरने को अवान ने इस्लाम विरोधी और पाकिस्तानी संस्कृति के खिलाफ बताया था।

कई कट्टरपंथी संगठनों ने इस मार्च को रोकने के लिए इस्लामाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मगर कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। महिला दिवस के मौके पर सुबह से ही इस मार्च को लेकर सरगर्मियां तेज हो गईं। 
विज्ञापन


मुख्य मार्च इस्लामाबाद में निकाला गया जबकि कराची, लाहौर, मुल्तान, फैसलाबाद, लरकाना और क्वेटा समेत कई और शहरों की सड़कों पर भी बड़ी संख्या में महिलाएं नजर आईं। ‘हम औरतें’ नाम के स्वयंसेवी संगठन ने 2018 में इस मार्च की शुरुआत की थी।

औरत मार्च को लेकर लगातार पाकिस्तानी समाज दो हिस्सों में बंटा दिखाई दिया और महिलाओं को आजादी के सवाल पर कई कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों ने इसका विरोध करते रहे हैं। पिछले साल से इस मार्च के आयोजकों और कई महिलाओं को धमकियां भी मिली थीं।

इस्लामाबाद कोर्ट ने इस मार्च के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में लोगों को अपनी मांग रखने और कानून के दायरे में जुलूस निकालने का अधिकार है। 

पाकिस्तान के अखबार डॉन के मुताबिक इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अतहर मिन्लाह ने महिलाओं का समर्थन करते हुए कहा कि यह मार्च उन लोगों को माकूल जवाब देने का बेहतर मौका है, जो इस पर सवाल उठा रहे हैं और महिलाओं की मंशा को गलत समझते हैं। मगर उन्होंने ये भी कहा कि मार्च कानून के दायरे में हो और अगर कानून के खिलाफ कुछ भी होगा तो कार्रवाई करनी पड़ेगी।

बहरहाल कानून के दायरे में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने पूरे पाकिस्तान में औरत मार्च निकाला। आयोजकों ने महिलाओं को बराबरी का हक देने और हर क्षेत्र में महिलाओं को आगे आने का मौका देने के साथ ही उन्हें घर की कैद से बाहर निकल कर शिक्षा और नौकरी के अधिकार की बात भी कही गई। इस बार बड़ी संख्या में ट्रांसजेंडर भी इसमें शरीक हुए।

मार्च में जमात-ए-इस्लामी के नेता भी शामिल हुए। इसके मुखिया सिराजुल हक ने दावा किया कि वो आने वाले किसी भी चुनाव में एक भी ऐसे पुरुष उम्मीदवार को टिकट नहीं देंगे, जो अपनी बहन-बेटियों के अधिकारों को सुरक्षित रखने और उन्हें आगे ले जाने का विरोधी होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को मेहर के अलावा शिक्षा और नौकरी का पूरा हक है और ये उन्हें मिलना ही चाहिए।

जियो न्यूज़ के मुताबिक औरत मार्च के दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की व्यवस्था की गई थी ताकि किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके और महिलाओं की सुरक्षा को कोई खतरा न हो।

दूसरी तरफ सूचना प्रसारण मंत्री फिरदौस आशिक अवान ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर लाहौर में आयोजित एक समारोह के दौरान कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बगैर किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ना और देश को आगे बढ़ाना नामुमकिन है।

क्वेटा प्रेस क्लब में हुए एक समारोह में सिविल सोसाइटीज के सदस्यों ने औरत मार्च में हिस्सा लिया और महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य के अलावा तमाम क्षेत्रों में उनके आगे बढ़ाए जाने की बात रखी। विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने मुल्तान में एक समारोह के दौरान पाकिस्तान की उन बेटियों और मां को सलाम किया जिन्होंने अलग अलग क्षेत्रों में देश का नाम ऊंचा किया है।

ट्विटर और सोशल मीडिया के तमाम मंचों पर भी महिलाओं को लेकर बड़ी बड़ी बातें कही गईं। इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री इमरान खान ने महिला दिवस के मौके पर संदेश देते हुए कहा था कि बगैर महिलाओं की भागीदारी के देश आगे नहीं बढ़ सकता और हर क्षेत्र में उन्हें आगे लाना और उचित मौके देना उनकी सरकार की प्राथमिकता है।

उधर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अलवी ने महिलाओं के मौलिक अधिकारों की बात की और कहा कि पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की सरकार महिलाओं के हकों को लेकर और पाकिस्तान को एक वेलफेयर इस्लामी देश बनाने को लेकर प्रतिबद्ध है। एक रेडियो इंटरव्यू में आरिफ अलवी ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाली किसी भी हिंसा को रोकने और उन्हें पूरा अधिकार दिलाने के लिए सरकार पूरी तरह गंभीर है।

लेकिन इन सब के बीच महिला दिवस के मौके पर भी पाकिस्तान कश्मीर का नाम लेना नहीं भूला। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ट्वीट करके कश्मीर में 1989 के बाद से अब तक पुलिस और सेना की हिंसा का शिकार हुई महिलाओं के प्रति संवेदना जताई। पाकिस्तान ने दावा किया कि 1989 से अबतक कश्मीर में 22911 महिलाएं विधवा हुईं, 11179 महिलाओं के साथ बलात्कार और बर्बर जुल्म हुए और 2377 महिलाओं की हत्या हुई।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें