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पाकिस्तान की चूलें हिलीं: आसिम मुनीर के लिए नासूर बनी बगावत, हर माह 120 सुरक्षाकर्मियों की मौत

सार

पाकिस्तान पश्चिम एशिया युद्ध में मध्यस्थता की नाकाम कोशिश कर अपनी पीठ थपथपा रहा है, लेकिन हकीकत ये है कि पाकिस्तान की खुद की चूलें हिली हुई हैं और पाकिस्तानी सेना को कई मोर्चों पर बगावत का सामना करना पड़ रहा है। 
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पाकिस्तानी सेना बगावत से परेशान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पाकिस्तान में सशस्त्र विद्रोह के खिलाफ जारी लड़ाई की कीमत चुकाना सुरक्षा बलों के लिए लगातार बहुत भारी पड़ रहा है। दक्षिण एशिया के आतंकवाद और सुरक्षा घटनाक्रम पर नजर रखने वाले साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (एसएटीपी) के नवीनतम आंकड़े यह तस्दीक करते हैं कि पाकिस्तानी सेना के लिए आंतरिक मोर्चे पर यह युद्ध साल दर साल कितना खूनी और अनियंत्रित होता जा रहा है। 
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दो साल में 131% बढ़ीं मौतें
  • 2023: 532 सुरक्षाकर्मी मारे गए।
  • 2024: यह संख्या बढ़कर 754 हुई, यानी 41.7% की वृद्धि।
  • 2025: मौतें 1,229 पहुंच गईं, यानी एक साल में करीब 63% की बढ़ोतरी।
  • सिर्फ दो साल (2023 से 2025) में सुरक्षा बलों की मौतों में 131% की वृद्धि दर्ज।

2026 में संकट और गहराया
जनवरी-अगस्त 2026: आठ महीनों में 957 सुरक्षाकर्मी मारे गए। यानी औसतन हर महीने करीब 120 सुरक्षाकर्मियों की मौत। 2025 का मासिक औसत की करीब 102 मौतें। इस साल का मासिक औसत पिछले साल के मुकाबले करीब 18% ज्यादा है।
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मुख्य संघर्ष क्षेत्र
पाकिस्तान में सुरक्षा बलों की यह मौतें मुख्य रूप से दो प्रमुख अंचलों- बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा- में केंद्रित हैं। बलूचिस्तान में अकेले 2025 में 751 और खैबर पख्तूनख्वा में 455 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। दोनों को मिलाकर कुल 1,206 मौतें इन दो प्रांतों में हुईं, जबकि पूरे देश का कुल आंकड़ा 1,229 था। इस साल अब तक अकेले बलूचिस्तान में 630 सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं। जबकि खैबर पख्तूनख्वा में यह संख्या 280 है। इस तरह इस साल अब तक लगभग 68 फीसदी सुरक्षा बलों की मौतें केवल बलूचिस्तान से सामने आई हैं। यह पाकिस्तान की बदलती आंतरिक सुरक्षा स्थिति का सबसे बड़ा संकेत है। खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) मुख्य आतंकी चुनौती बना है, वहीं बलूचिस्तान में बलूच विद्रोह ने पाकिस्तान की चूलें हिला रखी हैं।

टीटीपी और बीएलए में कौन पड़ा भारी?
आंकड़े दर्शाते हैं कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) से जुड़े संघर्षों में सुरक्षा बलों की मौतें टीटीपी से जुड़े मामलों की तुलना में कहीं ज्यादा हैं। साल 2024 में बीएलए से जुड़ी घटनाओं में 151 और टीटीपी से जुड़े मामलों में 71 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। साल 2025 में बीएलए से संघर्ष में 339 और टीटीपी के साथ 174 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई। इस साल सितंबर की शुरुआत तक बीएलए से जुड़े संघर्षों में 136 और टीटीपी से जुड़े मामलों में 87 सुरक्षाकर्मियों की मौतें सामने आई हैं। हालांकि कई हमले अप्रत्यक्ष या अज्ञात श्रेणी में भी होते हैं। साफ है कि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वाह दोनों ही पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र के लिए कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। अपनी आंतरिक व्यवस्था संभालने की जद्दोजहद में पाकिस्तानी सेना और अन्य सुरक्षा बल भारी मानवीय कीमत चुका रहे हैं।
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