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दुनिया के नक्शे पर भारत के वोट से क्यों तिलमिलाया पाकिस्तान?: कश्मीर पर फिर अलापा पुराना राग, जानें पूरा मामला

Mon, 07 Sep 2026 11:35 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

संयुक्त राष्ट्र में दुनिया के नक्शे को ज्यादा सही तरीके से दिखाने वाले प्रस्ताव के पक्ष में भारत के मतदान के बाद पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा फिर उठा दिया है। भारत ने साफ कहा कि प्रस्ताव का किसी देश की सीमा या विवादित क्षेत्र से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद पाकिस्तान ने भारत के रुख को बेबुनियाद बताया। आखिर नक्शे के एक प्रस्ताव पर पाकिस्तान इतना मुखर क्यों हो गया?
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क्यों तिलमिला उठा पाकिस्तान? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र में दुनिया के नक्शे को लेकर आए एक प्रस्ताव पर भारत के समर्थन के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बयानबाजी फिर तेज हो गई है। भारत ने 4 सितंबर को अपनाए गए प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस वोट का मकसद केवल दुनिया के नक्शों में महाद्वीपों के आकार को ज्यादा सही तरीके से दिखाने के सिद्धांत का समर्थन करना था। भारत ने यह भी साफ किया कि प्रस्ताव का जम्मू-कश्मीर, लद्दाख या किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा के राजनीतिक दर्जे से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद अगले ही दिन पाकिस्तान ने भारत के रुख को निशाना बनाया और जम्मू-कश्मीर पर अपने पुराने दावे दोहरा दिए।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के नक्शे वाले प्रस्ताव पर वोट क्यों दिया?

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर को दुनिया के नक्शे में महाद्वीपों के आकार को ज्यादा सही तरीके से दिखाने से जुड़ा प्रस्ताव अपनाया। इसका उद्देश्य ऐसे नक्शों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, जिनमें अलग-अलग महाद्वीपों का क्षेत्रफल वास्तविक आकार के अनुपात में ज्यादा सही नजर आए। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने अपने वोट की व्याख्या में समान क्षेत्रफल वाले नक्शों के सिद्धांत को समर्थन देने की बात रखी। यानी भारत का वोट किसी राजनीतिक सीमा या विवादित क्षेत्र के समर्थन में नहीं था।

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भारत ने जम्मू-कश्मीर पर क्या साफ किया?

भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव किसी खास विश्व नक्शे को मंजूरी नहीं देता। न ही यह किसी खास नक्शा बनाने की पद्धति या राष्ट्रीय सीमाओं के चित्रण को मान्यता देता है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नाम से जुड़े राजनीतिक नक्शों पर कोई फैसला नहीं किया गया है। भारत ने साथ ही अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर रुख को स्पष्ट, लगातार एक जैसा और गैर-परक्राम्य बताया। ऐसे में भारत के अनुसार इस प्रस्ताव को जम्मू-कश्मीर के दर्जे से जोड़ना सही नहीं है।

पाकिस्तान ने भारत के बयान पर क्या कहा?

भारत के स्पष्टीकरण के एक दिन बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने भारत के दावे को खारिज कर दिया। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर भारत के रुख को बेबुनियाद बताया। उसने कहा कि भारत की कथित एकतरफा कार्रवाई और जम्मू-कश्मीर पर उसका नियंत्रण क्षेत्र की स्थिति को नहीं बदल सकता। पाकिस्तान ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में लंबे समय से लंबित विवाद बताया और इस मुद्दे पर अपने पुराने रुख को दोहराया।

पाकिस्तान ने जनमत संग्रह का मुद्दा क्यों उठाया?

पाकिस्तान के बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का हवाला देते हुए कहा गया कि जम्मू-कश्मीर का अंतिम फैसला वहां के लोगों की इच्छा के आधार पर होना चाहिए। पाकिस्तान ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह की अपनी पुरानी मांग भी दोहराई। उसने भारत के आधिकारिक नक्शों और जम्मू-कश्मीर पर संप्रभुता के दावे को भी खारिज किया। इस तरह पाकिस्तान ने दुनिया के नक्शे को लेकर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को फिर जम्मू-कश्मीर के पुराने विवाद से जोड़ने की कोशिश की।

कितने देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया?

संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया। एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन मतदान से अलग रहे। प्रस्ताव के खिलाफ केवल अमेरिका ने वोट किया। यह प्रस्ताव टोगो की ओर से पेश किया गया था और 4 सितंबर को इसे अपनाया गया। भारत के समर्थन के बाद विदेश मंत्रालय ने अपने वोट की वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की, ताकि यह साफ रहे कि भारत ने किसी राजनीतिक नक्शे या सीमा के मुद्दे पर अपना रुख नहीं बदला है।

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