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Pakistan: आईएमएफ के बाद चीन के सामने कटोरा लेकर पहुंचा पाकिस्तान, 3.3 अरब डॉलर का कर्ज लेने की बना रहा योजना

Tue, 24 Jun 2025 11:15 PM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने आईएमएफ के बाद चीन के सामने 3.3 अरब डॉलर के कर्ज की गुहार लगाई है। इसमें 2 अरब सिंडिकेटेड लोन और 1.3 अरब की री-फाइनेंसिंग शामिल है। कर्ज मिलने पर पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 14.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

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पाकिस्तान और चीन - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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गहरे आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान ने एक बार फिर चीन से मदद की गुहार लगाई है। दरअसल, वह चीन के बैंकों से 3.3 अरब डॉलर (करीब 924 अरब रुपये) का कर्ज लेने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से भी एक अरब डॉलर का ऋण लिया था।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस राशि में से दो अरब डॉलर का कर्ज चीनी बैंकों के एक समूह से सिंडिकेटेड लोन के रूप में मिलेगा, जो तीन साल के लिए होगा। इसके अलावा 1.3 अरब डॉलर की राशि इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (आईसीबीसी) से पहले लिए गए कर्ज की री-फाइनेंसिंग के तौर पर होगी, जिसे कुछ महीने पहले पाकिस्तान ने चुकाया था।

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विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 14 अरब डॉलर से पहुंचने की उम्मीद
बता दें कि पाकिस्तान की तरफ से चीन के सामने कर्ज की गुहार लगाने के बाद अगर यह सौदा जून के अंत तक पूरा हो जाता है, तो स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) का विदेशी मुद्रा भंडार 14.5 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। ध्यान रहे कि 13 जून 2025 तक यह भंडार 11.7 अरब डॉलर था। साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान सरकार इस रकम का उपयोग जुलाई की शुरुआत में परिपक्व हो रहे छोटे अवधि के घरेलू कर्ज को चुकाने में करेगी।

शहबाज शरीफ ने चीन का जताया आभार
दूसरी ओर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को चीन के लगातार आर्थिक समर्थन पर आभार जताया। शरीफ ने कहा कि इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिली है। उन्होंने चीन के राजदूत जियांग जाइडोंग से मुलाकात में यह बात कही। शहबाज शरीफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान और चीन मिलकर सीपीईसी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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क्या है सीपीईसी परियोजना, समझिए

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गौरतलब है कि सीपीईसी यानी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा, चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 2013 में हुई थी। यह पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ता है। अब तक सीपीईसी में 62 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हो चुका है, जिसमें से 25 अरब डॉलर नकद पाकिस्तान में लगे हैं। हालांकि भारत सीपीईसी का विरोध करता रहा है, क्योंकि यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरता है।

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