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पाक का आईएमएफ से समझौता, 3 साल में मिलेंगे 6 अरब डॉलर

Tue, 14 May 2019 12:45 AM IST
गौरव द्विवेदी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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सांकेतिक तस्वीर
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पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच आखिरकार रविवार देर रात तक समझौता हो ही गया। कई महीनों की वार्ता के बाद आईएमएफ खस्ताहाल अर्थव्यवस्था वाले इस देश को तीन साल में छह अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज देगा। हालांकि माना जा रहा है कि इस कर्ज के लिए पाक ने आईएमएफ की उन कड़ी शर्तों पर सहमति जता दी है जिनमें सरकार को महंगाई, उच्च कर्ज और सुस्त विकास की समस्याओं से निपटने की जरूरत को स्वीकार करना शामिल है। आईएमएफ ने कहा, वह देश में कर सुधारों की समर्थक है लेकिन इससे खर्च में बढ़ोतरी होगी।

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‘डॉन न्यूज’ ने वित्त, राजस्व एवं आर्थिक मामलों पर पाक पीएम के सलाहकार डॉ. अब्दुल हफीज शेख के हवाले से कहा कि अधिकारी स्तर पर इस समझौते को अभी वाशिंगटन में आईएमएफ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की औपचारिक मंजूरी मिलनी बाकी है। पीएम के सलाहकार ने सरकारी टीवी पर समझौते की पुष्टि करते हुए कहा आगामी तीन सालों में मिलने वाले छह अरब डॉलर को कहां कितना लगाना है यह देखना होगा, लेकिन हम कोशिश करेंगे कि कम आय वर्ग के लोगों पर ज्यादा बोझ न पड़े। यानी इतना साफ है कि इस कर्ज के लिए पाकिस्तान ने देश में कर बोझ बढ़ाने का मन बना लिया है। 

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक पाक को रुपये के एक्सचेंज रेट में फ्री-फ्रोटिंग मैकेनिज्म पर फंड मिल रहा था, लेकिन 2017 से अब तक उसका करीब 34 फीसदी अवमूल्यन हो चुका है। ऐसे में आईएमएफ की घोषणा से लग रहा है कि पाकिस्तान ने उनकी मांगों को मान लिया है।
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बदलने पड़े वित्तमंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर

पाकिस्तान को आईएमएफ के इस कर्ज के लिए वार्ता से ठीक पहले अपने वित्तमंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर को हटाना भी पड़ा। वित्तमंत्री असद उमर को इसलिए हटना पड़ा क्योंकि उन्होंने फंडिंग वार्ता में देरी की और मदद के लिए मित्र देशों पर निर्भरता जताई। जबकि रुपये की लगातार गिरावट पर चिंता जताने के कारण केंद्रीय बैंक के गवर्नर को हटाकर उनकी जगह आईएमएफ के पूर्व कर्मचारी को नया गवर्नर बनाया गया।

उम्मीद से दो अरब डॉलर कम मिले

आपको बता दे कि पाकिस्तान को आईएमएफ से करीब 8 अरब डॉलर का राहत पैकेज मिलने की उम्मीद थी। आईएमएफ से पाकिस्तान लगभग आठ अरब डॉलर के कोष की मांग कर रहा था। लेकिन उसे मात्र छह अरब डॉलर में ही संतोष करना पड़ा है।

खतरे में अर्थव्यवस्था

वित्तीय सलाहकार हफीज शेख ने स्वीकार किया कि देश में व्यापार घाटा 20 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और पिछले दो सालों में हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में 50 प्रतिशत की कमी आई है। इसलिए पाकिस्तानी वार्षिक भुगतान में 12 अरब डॉलर का अंतर है और हमारे पास उन्हें भुगतान करने की क्षमता नहीं है। पाक का सार्वजनिक कर्ज भी बढ़कर 27.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इससे भविष्य खतरे में है।

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