दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी झड़पों ने अब एक 'खुले युद्ध' का रूप ले लिया है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने घोषणा की है कि तालिबान अधिकारियों के साथ उनके देश के 'धैर्य का प्याला छलक गया है' और दोनों देश अब खुली जंग में हैं। इस ताजा सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए इस पूरे संकट को आसान सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं।
दोनों इस्लामी देशों के बीच इस खूनी जंग की असली वजह क्या है?
सैन्य ताकत के मामले में दोनों देश कहां खड़े हैं?
जवाब: दोनों देशों की सैन्य क्षमता में भारी अंतर है। सिंगापुर के एस राजरत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के विद्वान अब्दुल बासित के अनुसार, अफगान तालिबान के पास पाकिस्तान जैसी आधुनिक सेना या वायुसेना नहीं है। पाकिस्तान हवाई हमलों के जरिए बढ़त बना रहा है, जबकि अफगानिस्तान आत्मघाती हमलावरों और कामिकेज़ ड्रोन जैसे अपरंपरागत तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है।
इस युद्ध पर दुनिया भर के देशों की क्या प्रतिक्रिया है?
रमजान के पवित्र महीने में हो रहे इस संघर्ष पर वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं:
भारत: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की ओर से अपनी आंतरिक विफलताओं को बाहर थोपने का एक और प्रयास है, जिसमें महिलाएं और बच्चे मारे गए हैं।
संयुक्त राष्ट्र व अन्य: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने का आग्रह किया है। ईरान ने बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है, जबकि रूस ने तत्काल हमले रोकने का आग्रह करते हुए मध्यस्थता की पेशकश की है।
आगे के लिए क्या संकेत?
साल 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच 75 से अधिक बार झड़पें हो चुकी हैं। अक्तूबर 2025 में कतर और तुर्किये की मध्यस्थता से हुआ संघर्ष विराम अब पूरी तरह टूट चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही पाकिस्तानी सैनिक सीमा पार करके जमीनी हमला न करें, लेकिन भारी तोपखाने और एयरस्ट्राइक का इस्तेमाल जारी रह सकता है। यदि अफगानिस्तान टीटीपी पर लगाम नहीं लगाता है, तो आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच इस टकराव का और अधिक गंभीर होना तय है।