पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पेशावर में 'शांति जिरगा' बुलाई गई है। इसमें दोनों देशों के कबीलाई बुजुर्ग, नेता और सामाजिक कार्यकर्ता जुटेंगे। जिरगा का मकसद दोनों हुकूमतों पर बातचीत का दबाव बनाना है, जिससे सरहद पर जारी हिंसक टकराव को रोका जा सके।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल के दिनों में खूब बारूदी तनातनी देखने को मिली है। इस वजह से सरहद के दोनों तरफ रहने वाले आम नागरिकों को काफी परेशानी हो रही है। सीमा पर जारी हवाई हमलों, गोलाबारी और दोनों तरफ से लग रहे गंभीर आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब दोनों देशों की अवाम ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। इसी सिलसिले में 31 मार्च को खैबर पख्तूनख्वा की राजधानी पेशावर में 'शांति जिरगा' का आयोजन होने जा रहा है।
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अरबाब शहजाद खान करेंगे अगुवाई
अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर इसकी कमान कौन संभालने वाला है? दरअसल, इस बड़े सम्मेलन की अगुवाई खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व मुख्य सचिव अरबाब शहजाद खान कर रहे हैं। अरबाब शहजाद 'एस्पायर खैबर पख्तूनख्वा' नाम की संस्था के प्रमुख भी हैं। उनकी यह संस्था 'कौमी इस्लाही तहरीक' के साथ मिलकर इस जिरगा का आयोजन कर रही है।
अरबाब शहजाद खान ने कहा कि जंग किसी भी मसले का हल नहीं है। बंदूक की गोली सिर्फ तबाही लाती है। सभी विवादों का हल केवल और केवल आपसी बातचीत के जरिए ही निकाला जाना चाहिए।
जिरगा में कौन-कौन होगा शामिल?
इस शांति जिरगा में दोनों देशों के जाने-माने नेता और कबीलाई बुजुर्ग, उलेमा और धार्मिक विद्वान, सिविल सोसाइटी के सदस्य,बड़े कारोबारी और मीडिया से जुड़े लोग शामिल होंगे। इसके अलावा, पाकिस्तान में रह रहे अफगान नागरिक भी इस बैठक में अपनी आवाज बुलंद करेंगे। आयोजकों ने उन तमाम कद्दावर नेताओं को भी न्योता भेजा है, जो अतीत में दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों को संभालने में अपना अहम योगदान दे चुके हैं।
क्या है इस जिरगा का मकसद?
जिरगा का मकसद दोनों देशों के हुक्मरानों से यह अपील करना है कि वे तनाव को कम करें और दोस्ती का हाथ बढ़ाएं। अरबाब का कहना है कि हमारी कोशिश है कि दोनों देशों के बीच अमन-चैन और बातचीत का सिलसिला दोबारा शुरू हो सके।