इंटरनेट बंद होना पाकिस्तान के लिए बड़ी समस्या
पाकिस्तान में जारी गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट का असर अब हर क्षेत्र में साफ दिखने लगा है। दुनिया का चौथा सबसे बड़ा फ्रीलांसिंग हब होने के बावजूद, बार-बार इंटरनेट बंद होने से पाकिस्तान को करीब 1.62 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है और 23.7 लाख फ्रीलांस नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं।
देश छोड़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2024 में 7.27 लाख पाकिस्तानियों ने विदेश नौकरी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था, जबकि 2025 में नवंबर तक 6.87 लाख लोग यह प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। अब यह पलायन सिर्फ मजदूरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और रिसर्चर भी बड़ी संख्या में देश छोड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, 2011 से 2024 के बीच नर्सों के पलायन में 2,144 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह सिलसिला 2025 में भी जारी है।
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शहबाज सरकार ने एयरपोर्ट पर बढ़ाई सख्ती
हालात काबू में करने के लिए शहबाज शरीफ सरकार ने एयरपोर्ट पर सख्ती बढ़ाई है, लेकिन नतीजे संतोषजनक नहीं हैं। 2025 में 66,154 यात्रियों को एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना है। इसके अलावा, कई पाकिस्तानियों को खाड़ी देशों से भीख मांगने और अवैध प्रवास के आरोप में वापस भेजा गया है।
सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए आसीम मुनीर
इस बीच, सेना प्रमुख आसिम मुनीर के ‘ब्रेन ड्रेन नहीं, ब्रेन गेन’ वाले बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि यह बयान 'मानसिक मरीज' के हिसाब से ब्रेन गेन है। वहीं, पीटीआई समर्थक साजिद सिकंदर अली ने कहा कि देश में ना इंडस्ट्री है, ना रिसर्च फंडिंग और ना ही नौकरियां, ऐसे में प्रतिभा को रोका नहीं जा सकता, सिर्फ अवसर देकर ही उन्हें देश में रखा जा सकता है।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार की कमी, अभिव्यक्ति की आजादी का डर और राजनीतिक दमन पाकिस्तान को इस हालात तक ले आए हैं। आज स्थिति यह है कि पढ़ा-लिखा युवा अपने ही देश में भविष्य नहीं देख पा रहा, जो पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है।
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