पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार के मामले में दिन-प्रतिदिन और बढ़ोतरी होती जा रही है। इसी सिलसिले में एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली 15 साल की हिंदू छात्रा शनीला मेघवार को बीते 23 जून को रात के समय बंदूकधारियों ने उसके घर से जबरदस्ती उठा लिया। यह घटना सिंध प्रांत के बादिन जिले के मतली इलाके की है। मामले में वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) नामक मानवाधिकार संगठन ने बताया कि शनीला को उसके घर से दो हथियारबंद लोग जबरन बाहर ले गए और एक सफेद गाड़ी में डालकर फरार हो गए। गाड़ी में पहले से दो और लोग मौजूद थे। इस घटना के बाद से शनीला का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।
एफआईआर दर्ज कराने के लिए भी करना पड़ा संघर्ष
मामले में पीड़ित परिवार का संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ। शनीला के चाचा मजनू महाराज के अनुसार पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के लिए भी उन्हें बहुत दबाव बनाना पड़ा। फिर भी रिपोर्ट में मुख्य आरोपी मकसूद डार्स का नाम नहीं जोड़ा गया। परिवार का आरोप है कि पुलिस जानबूझकर आरोपियों को बचा रही है।
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वहीं संगठन का कहना है कि यह सिर्फ एक बच्ची का मामला नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय की उस पीड़ा का हिस्सा है जिसमें नाबालिग लड़कियों को अगवा कर जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह जैसी यातनाएं दी जाती हैं। सोशल मीडिया पर शनीला के लिए इंसाफ की मांग को लेकर कई पोस्ट किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सिंध के खीप्रो से भी आया एक मामला
इसी तरह का एक और मामला सिंध के ही खीप्रो क्षेत्र से सामने आया है। माइनॉरिटी राइट्स ऑर्गनाइजेशन के सह-संस्थापक शिवा कच्छी के मुताबिक, 14 साल की हिंदू लड़की कमला को तीन महीने पहले अगवा किया गया, जबरन इस्लाम धर्म कबूल करवाया गया और निकाह करवा दिया गया। कमला को अदालत में पेश किया गया, जहां उसके वकील ने उसकी उम्र साबित करने के लिए जन्म प्रमाण दस्तावेज दिखाया। लेकिन इसके बावजूद अदालत ने लड़की की जबानी गवाही को ही अहम माना और उसे कथित अपहरणकर्ता मुस्लिम युवक को सौंप दिया।
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पुलिस पर लापरवाही का आरोप
मामले में शिवा कच्छी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सिंध चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट एक्ट और हाल ही में बने संघीय कानूनों के बावजूद, नाबालिगों के जबरन विवाह जैसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। इन दोनों मामलों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय खासकर हिंदू लड़कियां कितनी असुरक्षित हैं, और इंसाफ की राह उनके लिए कितनी मुश्किल है।