डॉन अखबार की खबर के मुताबिक, न्यायमूर्ति याह्या अफरीदी की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) प्रमुख की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए। बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी में छह जून को अज्ञात लोगों ने वरिष्ठ वकील अब्दुल रज्जाक शार की उस समय हत्या कर दी थी जब वह बलूचिस्तान उच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण सुनवाई के लिए अदालत जा रहे थे। एक दिन बाद पुलिस ने एक मामला दर्ज किया और वकील के बेटे की शिकायत पर प्राथमिकी (एफआईआर) में खान को नामित किया।
वकील अब्दुल रज्जाक शर ने बलूचिस्तान उच्च न्यायालय में खान के खिलाफ एक संवैधानिक याचिका दायर की थी, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ अनुच्छेद 6 के तहत कार्यवाही की मांग की गई थी, जो राजद्रोह से संबंधित है। संघीय सरकार और पीटीआई ने इस घटना के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहराया था, दोनों पक्षों ने हत्या में एक-दूसरे की भूमिका होने का आरोप लगाया था।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सहयोगी अताउल्लाह तरार ने आरोप लगाया था कि देशद्रोह के मामले में कथित तौर पर जवाबदेही से बचने के लिए खान के इशारे पर शर की हत्या की गई। खबर के अनुसार दूसरी ओर पीटीआई के प्रवक्ता रऊफ हसन ने हत्या के पीछे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह का हाथ होने का आरोप लगाया है। आतंकवाद रोधी अदालत (एटीसी) ने बाद में मामले में खान की गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था, जिसे बाद में बलूचिस्तान उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की खबर के अनुसार खान ने हत्या के मामले में आरोपी के तौर पर नामित किए जाने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने 20 जुलाई को मामले की पिछली सुनवाई के दौरान पीटीआई अध्यक्ष को प्राथमिकी रद्द करने और गिरफ्तारी वारंट जारी करने से पहले पीठ के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था। सोमवार की सुनवाई के दौरान खान अपने वकीलों के साथ सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए।
चुनाव आयोग का आदेश- इमरान खान को गिरफ्तार कर पेश करें
इस बीच, चुनाव आयोग (ईसीपी) ने आज इस्लामाबाद पुलिस को निर्देश दिया कि वह शीर्ष चुनाव निकाय की अवमानना से जुड़े एक मामले में पूर्व प्रधानमंत्री खान को गिरफ्तार करे और उन्हें मंगलवार को उसके समक्ष पेश करे। सुनवाई से खान के लगातार अनुपस्थित रहने से नाराज ईसीपी ने इस्लामाबाद के आईजी को अवमानना मामले में पेश होने में विफल रहने पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) प्रमुख को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया।
ईसीपी ने खान और पीटीआई के पूर्व नेताओं असद उमर और फवाद चौधरी के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग के खिलाफ कथित तौर पर 'असंयमित' भाषा का इस्तेमाल करने को लेकर पिछले साल अवमानना कार्यवाही शुरू की थी। सदस्य निसार दुर्रानी की अध्यक्षता वाली ईसीपी की चार सदस्यीय पीठ ने 11 जुलाई को पिछली सुनवाई में उमर को बख्शते हुए खान और चौधरी के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। अदालत ने सभी को पेश होने के आदेश के साथ सुनवाई 25 जुलाई के लिए स्थगित कर दी।