एक ऐतिहासिक फैसले में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने अत्यधिक संख्या में अध्यादेशों को लागू करने के लिए प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि अध्यादेश केवल आकस्मिक मामलों में ही जारी किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रपति या राज्यपाल संवैधानिक आवश्यकताओं को पूरा किए बिना अध्यादेश जारी नहीं कर सकते।
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यह देखते हुए कि अध्यादेश केवल आपातकालीन मामलों में ही जारी किए जा सकते हैं, देश की शीर्ष अदालत ने सरकार चलाने के लिए अत्यधिक अध्यादेशों की घोषणा के खिलाफ फैसला सुनाया। जुलाई 2021 में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय को बताया गया था कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार द्वारा अध्यादेशों को लागू करने के लिए कार्रवाई की योजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पीठ द्वारा 30 पेज का ऐतिहासिक फैसला आया है। इमरान खान ने जुलाई 2018 से सत्ता के तीन साल के दौरान कम से कम 54 अध्यादेश जारी किए थे।
डॉन अखबार ने बताया कि प्रांतीय अदालत को बताया गया कि संघीय सरकार के नियमित कामकाज को चलाने के लिए कुछ अध्यादेश जारी किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि पाकिस्तान नेशनल असेंबली की वेबसाइट के अनुसार, मौजूदा सरकार के तीसरे संसदीय वर्ष में 16 से अधिक अध्यादेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। राष्ट्रपति और प्रांतीय गवर्नर अध्यादेश ला सकते हैं, लेकिन अध्यादेशों को लागू करने की उनकी शक्ति संविधान द्वारा सीमित है।