पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी (फाइल)
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पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को भ्रष्टाचार के दो मामलों में अदालत से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई है।
पार्क लेन और तोशखाना मामले में कार्रवाई पर रोक
बता दें कि पार्क लेन और तोशखाना मामले में जरदारी के खिलाफ पाकिस्तान के राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) द्वारा जांच की जा रही थी। जवाबदेही अदालत के न्यायाधीश नसीर जावेद राणा इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने राष्ट्रपति जरदारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ दो मामलों में कार्रवाई पर रोक लगाई।
जरदारी को राहत देते हुए अदालत ने सुनाया फैसला
न्यायाधीश ने बताया कि राष्ट्रपति जरदारी ने संविधान के अनुच्छेद 248(2) के तहत राहत की मांग की थी। जिसके बाद, याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। राष्ट्रपति की याचिका पर सरकारी वकील ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद अदालत ने फैसला लिया कि जब तक जरदारी राष्ट्रपति पद पर बने रहेंगे, तब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। कोर्ट ने इस बारे में लिखित आदेश जारी किया है।
इन मामलों में जांच से मिली राहत
जरदारी को पार्क लेन और तोशखाना मामले में राहत मिली है। पार्क लेन मामले में जरदारी पर 2008 से 2013 तक अपने पहले कार्यकाल के दौरान अधिकारियों से सांठगांठ करने का आरोप है। यह भी आरोप है कि उन्होंने अपनी प्रमुख कंपनियों के लिए ऋण प्राप्त किया और पाकिस्तान को 3.77 अरब रुपये का नुकसान पहुंचाया।
तोशखाना मामले में जरदारी पर सरकारी भंडार में मौजूद कीमती गाड़ियों को हेराफेरी कर खरीदने का आरोप है। दरअसल तोशखाना ऐसा भंडार है, जहां विदेशी देशों द्वारा पाकिस्तानी नेताओं को उपहार में दी गई सभी महंगी गाड़ियां या वस्तुएं जमा की जाती हैं। आरोप है कि इन गाड़ियों की कीमत का महज 15 फीसदी भुगतान करके राजकोष से लग्जरी कारें हासिल की गईं।