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Pakistan: पुलिस ने दंगे भड़काने की साजिश रचने के आरोप में तीन संदिग्धों को किया गिरफ्तार, IGP ने किया यह दावा

Mon, 28 Aug 2023 07:22 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, लाहौर।

सार

पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) उस्मान अनवर ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा, दुश्मन देश की खुफिया एजेंसी देश में मुस्लिम-ईसाई दंगे कराने की साजिश में लगी हुई है। जरांवाला घटना में शत्रु देश की खुफिया एजेंसी शामिल है। हमने एक नेटवर्क को तोड़ दिया है।
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पाकिस्तान पुलिस (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पाकिस्तान के पंजाब पुलिस प्रमुख ने सोमवार को कहा कि देश में "मुस्लिम-ईसाई दंगे" भड़काने की साजिश रचने के आरोप में तीन मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। लाहौर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) उस्मान अनवर ने कहा कि पुलिस ने जरांवाला में चर्चों और ईसाइयों के घरों को जलाने के आरोप में 300 संदिग्धों को हिरासत में लिया है।

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16 अगस्त को पंजाब की प्रांतीय राजधानी लाहौर से 130 किलोमीटर दूर फैसलाबाद जिले के जरांवाला शहर में एक ईसाई व्यक्ति के खिलाफ ईशनिंदा के आरोपों को लेकर गुस्साई भीड़ ने कई चर्चों और ईसाई इलाकों पर हमला कर दिया। उन्होंने एक ईसाई कब्रिस्तान पर भी हमला किया था और स्थानीय सहायक आयुक्त के कार्यालय में तोड़फोड़ की थी।

आईजीपी अनवर ने किया यह दावा
अनवर ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा, दुश्मन देश की खुफिया एजेंसी देश में मुस्लिम-ईसाई दंगे कराने की साजिश में लगी हुई है। जरांवाला घटना में शत्रु देश की खुफिया एजेंसी शामिल है। हमने एक नेटवर्क को तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किए गए 300 लोगों में से 180 पर औपचारिक रूप से आतंकवाद के मामलों के तहत आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, मुस्लिम-ईसाई दंगे कराने की साजिश के तीन प्रमुख संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने दावा किया कि साजिश के पीछे के नेटवर्क का पर्दाफाश हो गया है और भविष्य में ऐसी कोई घटना नहीं होगी।
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इससे पहले पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) के फैक्ट-फाइंडिंग मिशन ने घोषणा की थी कि इस महीने की शुरुआत में पंजाब प्रांत में ईसाई पूजा स्थलों, उनके आवासों और कब्रिस्तानों पर भीड़ का हमला स्थानीय ईसाइयों के खिलाफ बड़े नफरत अभियान का हिस्सा था। साथ ही एचआरसीपी ने घटना में कट्टरपंथी इस्लामवादियों की खुली संलिप्तता और पुलिस की मिलीभगत पर सवाल उठाया था।

एचआरसीपी ने कहा था, अल्पसंख्यक समुदाय पर हमले को पूरी तरह से आकस्मिक या सहज नहीं माना जा सकता है। आयोग ने संदेह जताया था कि यह स्थानीय ईसाइयों के खिलाफ एक बड़े नफरत अभियान के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था। साथ ही पुलिस की भूमिका और स्थिति को प्रभावी ढंग से कम करने और नियंत्रित करने की उसकी क्षमता पर भी सवाल उठाया गया था।

एचआरसीपी के बयान में कहा गया था कि एक ईसाई व्यक्ति के खिलाफ ईशनिंदा के आरोप में स्थानीय ईसाई समुदाय के खिलाफ क्रूर भीड़ के नेतृत्व वाले हमलों की एक श्रृंखला में कम से कम 24 चर्चों और कई दर्जन छोटे चर्चों के साथ-साथ कई घरों में आग लगा दी गई और लूटपाट की गई। पंजाब पुलिस के मुताबिक, भीड़ ने 20 चर्च और 86 ईसाइयों के घर जलाए थे।

एचआरसीपी ने व्यक्तियों या किसी धार्मिक अल्पसंख्यक के खिलाफ उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए देश के ईशनिंदा कानूनों की समीक्षा करने की भी सिफारिश की है। बयान में कहा गया है, संगठित चरमपंथी समूहों (जैसे टीएलपी) से निपटने के लिए नीतियों और रणनीतियों को विकसित करने की आवश्यकता है ताकि कोई भी व्यक्ति या समूह देश के अधिकार को कमजोर न कर सके।

पंजाब सरकार ने 94 ईसाई परिवारों को उनके घरों और जीवन के पुनर्निर्माण में मदद के लिए प्रत्येक को 20 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने की घोषणा की है, जबकि ईसाई नेताओं का कहना है कि हिंसा में कम से कम 200 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं और सभी को मुआवजा दिया जाना चाहिए।

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