पाकिस्तान की संसद के निचले सदन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पंजाब में चुनाव के लिए 21 अरब रुपये के पूरक अनुदान की मांग को खारिज कर दिया, जिससे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रांत में चुनावों को लेकर अनिश्चितता गहरा गई और सरकार और न्यायपालिका के बीच तनाव बढ़ गया।
कानून और न्याय मंत्री आजम नजीर तरार (Azam Nazeer Tarar) ने कैबिनेट द्वारा मामले को संसद में भेजे जाने के बाद चुनाव के खर्चों को पूरा करने के लिए नेशनल असेंबली (निचले सदन) में पूरक मांग प्रस्ताव पेश किया। हालांकि, सदन ने मंत्री के इस अनुरोध को ठुकरा दिया। सरकार ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) को चुनाव के लिए आवश्यक धन जारी करने के लिए दी गई समय सीमा के सोमवार को समाप्त होने के बाद उठाया।
वित्त और राजस्व राज्यमंत्री डॉ आइशा गौस पाशा ने मीडिया को बताया कि संघीय समेकित कोष (Federal Consolidated Funds) से धन जारी करने का अधिकार न तो एसबीपी के पास है और न ही वित्त विभाग के पास। उन्होंने समझाया कि आवंटन की प्रक्रिया को संसद से अनुमोदन की आवश्यकता है। पाशा ने कहा, संसद की मंजूरी के बिना किसी भी विधेयक या बजट की कोई कानूनी प्रामाणिकता नहीं है, इसलिए हम पूरे मामले को अब संसद पर छोड़ देते हैं। संसद हमारे लिए सर्वोच्च है क्योंकि संविधान में यही लिखा है। उन्होंने विस्तार से बताया कि एसबीपी केवल धन आवंटित कर सकता है, लेकिन इसे तब तक जारी नहीं कर सकता जब तक कि वित्त विभाग द्वारा उचित संकेत नहीं दिया जाता।
गौरतलब है कि संसद और न्यायपालिका पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में चुनाव कराने को लेकर आमने-सामने हैं क्योंकि पहले ही खर्च को पूरा करने के लिए धन अधिकृत करने से इनकार कर दिया गया है। इस गतिरोध ने राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ा दिया है और पहले से ही अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट से देश के डिफॉल्टर होने का खतरा बढ़ गया है।
इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट (एससी) ने पंजाब में चुनाव स्थगित करने के पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) के फैसले को "असंवैधानिक" घोषित किया था। सुरक्षा मुद्दों और आर्थिक संकट का हवाला देते हुए प्रांतीय चुनाव में देरी करने की कोशिश कर रही सरकार के लिए यह एक झटका था। पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ जिसमें न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर और न्यायमूर्ति इजाजुल अहसन शामिल हैं, ने प्रांत में मतदान की तारीख 14 मई तय की थी।
शीर्ष अदालत ने संघीय सरकार को ईसीपी को 10 अप्रैल तक 21 अरब रुपये की धनराशि प्रदान करने का आदेश दिया था और निकाय को 11 अप्रैल तक इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। सरकार फंड जारी करने की समय सीमा से चूक गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) को फंड जारी करने का आदेश दिया।