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पाकिस्तान: वित्त मंत्री बोले- तकनीकी कारणों से समझौते में देरी, IMF ने परमाणु कार्यक्रम पर नहीं रखी कोई शर्त

Mon, 20 Mar 2023 10:36 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

डार ने पिछले हफ्ते संसद में कहा था कि देश के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने आईएमएफ के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने में देरी के बारे में सांसद रजा रब्बानी के सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की थी।
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इशाक डार (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने सोमवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ समझौते में देरी के पीछे कुछ तकनीकी कारण हैं। आईएमएफ ने इन दावों को खारिज कर दिया है कि उसने परमाणु कार्यक्रम के बदले महीनों से बेलआउट पैकेज को बहाल नहीं किया है। 

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डार ने पिछले हफ्ते संसद में कहा था कि देश के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने आईएमएफ के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने में देरी के बारे में सांसद रजा रब्बानी के सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की। 

डार ने प्रेस को जारी एक बयान में कहा कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के संबंध में उनकी टिप्पणी एक सहयोगी संसद सदस्य के सवाल के जवाब में थी। इसमें डार ने कहा, मैंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान को अपने परमाणु कार्यक्रम को विकसित करने का संप्रभु अधिकार है, क्योंकि यह हमारे राष्ट्रीय हितों के लिए सबसे जरूरी है। इसे किसी भी तरह से आईएमएफ के साथ चल रही बातचीत से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। 
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बयान में उन्होंने कहा, यह स्पष्ट किया जाता है कि न तो आईएमएफ और न ही किसी देश ने हमारी परमाणु क्षमता के संबंध में पाकिस्तान पर कोई शर्त लगाई है और न ही किसी ने कोई मांग की है। आईएमएफ कर्मचारी स्तर के समझौते में देरी तकनीकी कारणों से हुई है, जिसे हम जल्द से जल्द हल पूरा करने के लिए आईएमएफ के साथ लगातार  बातचीत कर रहे हैं। 

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पाकिस्तान भारी नकदी संकट से जूझ रहा है। वह वॉशिंगटन स्थित वैश्विक मुद्रा ऋणदाता से 1.1 अरब डॉलर के वित्तपोषण की बहुप्रतीक्षित किस्त का इंतजार कर रहा है। इस किस्त को पिछले नवंबर में दिया जाना था। लेकिन आईएमएफ ने इस किस्त अब तक जारी नहीं किया है। आईएमएफ ने 2019 में पाकिस्तान के लिए 6.5 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की मंजूरी दी थी। विश्लेषकों का मानना है कि अगर पाकिस्तान को विदेशी ऋण दायित्वों में चूक से बचना है तो यह उसके लिए बेहद जरूरी है। 
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पाकिस्तान अभी भारी विदेशी कर्ज, रुपये की कीमत में गिरावट और घटते विदेशी मुद्रा भंडार से जूझ रहा है। उसके पास एक महीने मात्र एक महीने तक ही सामान आयात करने के पैसे बचे हैं। 

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