पिछले साल इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनके सैकड़ों और हजारों अनुयायियों और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं ने 9 मई को जिन्ना हाउस (लाहौर कोर कमांडर हाउस), मियांवाली एयरबेस और फैसलाबाद में आईएसआई भवन समेत एक दर्जन सैन्य प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की थी।
जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर सैन्य मुकदमा चलाने की आशंका को लेकर इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने शहबाज सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने मुकदमे को लेकर चल रही अटकलों को दूर करने के निर्देश दिए हैं।
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पिछले साल इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनके सैकड़ों और हजारों अनुयायियों और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं ने 9 मई को जिन्ना हाउस (लाहौर कोर कमांडर हाउस), मियांवाली एयरबेस और फैसलाबाद में आईएसआई भवन समेत एक दर्जन सैन्य प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की थी। इस दौरान रावलपिंडी में सेना मुख्यालय (जीएचक्यू) पर भी पहली बार भीड़ ने हमला किया था। इस मामले में पाकिस्तान सरकार ने पूर्व पीएम के खिलाफ सैन्य अदालत में मुकदमा चलाने के लिए आवेदन मांगा था।
सैन्य मुकदमे को लेकर इमरान खान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। खान ने कहा था कि कुछ हफ्तों पहले सेना के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी को सैन्य हिरासत में लिया गया था। मीडिया रिपोर्ट में अटकलें लगाई गईं कि उन्हें पिछले साल नौ और 10 मई से संबंधित मामलों में याचिकाकर्ता के खिलाफ सरकारी गवाह बनाया जा सकता है। याचिकाकर्ता को इस आधार पर सैन्य हिरासत में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
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याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने एक नागरिक पर सैन्य मुकदमे को लेकर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा याचिकाकर्ता और न्यायपालिका दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब ने सहायक अटॉर्नी जनरल अजमत बशीर तरार से मामले में अटॉर्नी जनरल के कार्यालय से निर्देश लेने और अदालत को स्पष्ट जानकारी देने के लिए कहा। न्यायाधीश ने सहायक अटॉर्नी जनरल से कहा कि आप कह रहे हैं कि अभी कोई मामला नहीं है, लेकिन क्या बाद में कोई मामला हो सकता है?
अदालत ने सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का समय देते हुए सुनवाई 16 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी। मामले में पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी ने कहा कि यदि सरकार सैन्य परीक्षण की किसी योजना से इनकार करती है, तो याचिका बेकार हो जाएगी। यदि कोई मुकदमा विचाराधीन होगा तो अदालत मामले की सुनवाई और निर्णय के लिए आगे बढ़ेगी।