पाकिस्तान की एक विशेष अदालत ने गोपनीय राजनयिक दस्तावेज (सिफर) के लीक होने के मामले में पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की रिमांड शुक्रवार को तीन दिन के लिए बढ़ा दी। इन दस्तावेजों का इमरान खान के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार द्वारा कथित तौर पर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग किया गया था।
जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगी और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के उपाध्यक्ष कुरैशी (67) को 19 अगस्त को शासकीय गोपनीयता अधिनियम के उल्लंघन के लिए गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि विदेश मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अमेरिका स्थित पाकिस्तानी दूतावास की ओर से विदेश कार्यालय को भेजे गए आधिकारिक दस्तावेज की गोपनीयता भंग की थी। बाद में उन्हें विशेष अदालत ने 25 अगस्त तक चार दिनों के लिए संघीय जांच एजेंसी (एफएआई) की हिरासत में भेज दिया था।
खान लंबे समय से लापता दस्तावेज का उल्लेख पिछले साल अप्रैल में उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए "विदेशी साजिश" के सबूत के रूप में करते रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जज अबुअल हसनत ने शुक्रवार को विशेष अदालत में मामले की बंद कमरे में सुनवाई की। इस अदालत को हाल ही में सांसदों के भारी विरोध के बीच इस महीने की शुरुआत में संसद द्वारा अनुमोदित आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था।
20 अगस्त को संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद कुरेशी को फ्रंटियर कोर और इस्लामाबाद पुलिस कर्मियों द्वारा भारी सुरक्षा में न्यायिक परिसर में पेश किया गया था। उनका प्रतिनिधित्व उनके वकील शोएब शाहीन ने किया, जिन्होंने एफआईए द्वारा कुरेशी की शारीरिक रिमांड का विरोध किया।
मामले के विशेष अभियोजक जुल्फिकार नकवी ने पीटीआई नेता की नौ दिन की रिमांड की मांग की थी। हालांकि, न्यायाधीश ने कुरैशी को तीन दिन के लिए एफआईए की हिरासत में भेज दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत सिफर मामले में पीटीआई अध्यक्ष इमरान खान और उनके डिप्टी कुरैशी का मुकदमा एक पखवाड़े के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।
बुशरा बीबी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- मेरे पति को जान का खतरा
इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी ने आज उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया कि वह उनके पति के बिगड़ते स्वास्थ्य का 'गंभीरता से संज्ञान' ले क्योंकि इससे 'उनकी जान को गंभीर खतरा' है। इमरान से मंगलवार को जेल में मुलाकात के बाद बुशरा ने शीर्ष अदालत का रुख किया था। बुशरा ने अपने वकील रिफाकत हुसैन शाह के जरिए सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया, जिसमें खान के स्वास्थ्य की खातिर दखल देने अनुरोध किया गया।
हलफनामे के मुताबिक, बुशरा ने उनके स्वास्थ्य में काफी गिरावट देखी और ऐसा लगता है कि कारावास के दौरान उनका वजन काफी कम हो गया था, विशेष रूप से उनकी बाहों के आसपास की मांसपेशियों को नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, ' 70 की उम्र के व्यक्ति के स्वास्थ्य में इस तरह की गिरावट उसके जीवन के लिए गंभीर खतरा हो सकती है... यह आशंका है कि याचिकाकर्ता के जीवन को गंभीर खतरा है, जिसके लिए विनम्रतापूर्वक प्रार्थना की जाती है कि यह माननीय अदालत कृपया इसे गंभीरता से ले।'
यह पहली बार नहीं है जब बुशरा ने अपने पति की जान को खतरा होने की आशंका जताई है। उन्होंने पिछले सप्ताह पंजाब सरकार को लिखे एक पत्र में भी इसी तरह की चिंता व्यक्त की है। पत्र में पूर्व प्रथम महिला ने कहा कि उन्हें डर है कि खान को जेल में 'जहर' दिया जा सकता है।