लाहौर उच्च न्यायालय ने मंबई आतंकवादी हमले के मुख्य षड्यंत्रकर्ता एवं जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद की वह अर्जी सोमवार को स्वीकार कर ली जिसमें उसने अपने खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के मामले को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए गुजरांवाला की एक आतंकवाद निरोधक अदालत से यहां की एक अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था।
यह जानकारी पाक मीडिया में आई एक खबर में दी गई है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वैश्विक आतंकवादी सईद को 17 जुलाई को आतंकवाद वित्तपोषण मामले में तब गिरफ्तार कर लिया गया था जब वह लाहौर से गुजरांवाला जा रहा था।
सईद की गिरफ्तारी से पहले जमात-उद-दावा के 13 नेताओं के खिलाफ आतंकवाद वित्तपोषण और आतंकवाद निरोधक कानून, 1997 के तहत धनशोधन के लिए करीब दो दर्जन प्रकरणों में मामले दर्ज किए गए थे। इन 13 नेताओं में सईद और नायब अमीर अब्दुल रहमान मक्की शामिल था।
‘डॉन’ समाचार पत्र की खबर के अनुसार लाहौर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सरदार शमीम अहमद ने सईद की ओर से दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई की। सईद ने उक्त याचिका में कहा कि उसे लाहौर के एक जेल में रखा गया है लेकिन उसे अदालत में प्रत्येक सुनवाई के लिए गुजरांवाला ले जाया जाता है।
समाचारपत्र की खबर के अनुसार सईद ने कहा कि सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर गुजरांवाला अदालत के समक्ष पेश होना उपयुक्त नहीं है। उसने कहा कि यदि उसे लाहौर की जेल में रखा गया है तो मामले को भी वहीं स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए।
समाचारपत्र की खबर के अनुसार सुनवाई के दौरान पाकिस्तान सरकार के एक वकील ने कहा कि उन्हें मामले को स्थानांतरित करने में कोई आपत्ति नहीं है। पंजाब पुलिस के आतंकवाद निरोधक विभाग ने प्रांत के विभिन्न शहरों में ‘आतंक वित्तपोषण’ के आरोपों में जमात-उद-दावा के सदस्यों के खिलाफ 23 प्राथमिकी दर्ज की है।