पाकिस्तान परमाणु उर्जा आयोग (पीएइसी) और चीन के झोंनग्यान इंजीनियरिंग कोऑपरेशन (जेईसी) ने परमाणु ऊर्जा सहयोग के लिए इसी माह एक समझौता किया है। इस समझौते से क्षेत्र में परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ने की आशंका जताई गई है। इस्राइली विशेषज्ञ फेबियन बासार्ट ने भारत के लिए इसे खतरनाक समझौता बताया है।
द टाइम्स आफ इस्राइल में प्रकाशित अपने लेख में बासार्ट ने कहा है कि यह समझौता भारत के लिए चिंता और चुनौतियां पैदा कर सकता है। चीन व पाकिस्तान ने इसी साल आठ सितंबर को यह समझौता किया है। इसकी रूपरेखा 20 अगस्त को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में बनाई गई थी। समझौता 10 साल के लिए वैध होगा। इसके तहत पाकिस्तान में परमाणु प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण, यूरेनियम का खनन और संवर्धन, परमाणु ईंधन की आपूर्ति और अनुसंधान रिएक्टरों की स्थापना की जाएगी।
इस समझौते को चीन के लिए पाकिस्तान में हथियारों का नया जखीरा तैयार करने की रणनीति माना जा रहा है। यह भारत के लिए चिंता की बात हो सकती है। समझौते में पाकिस्तान के सभी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण और रखरखाव के लिए चीन के व्यापक सहयोग की शर्तें भी समझौते का हिस्सा हैं।
पाकिस्तान में चार नए संयंत्र तैयार
पाकिस्तान में चार नए परमाणु संयंत्र तैयार किए गए हैं। इनमें से दो कराची में और दो मुजफ्फरगढ़ में हैं। इन्हें चीन की तकनीक व सहयोग से तैयार किया गया है। नए समझौते के तहत चीन परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अब पाकिस्तान की हर तरह से मदद करेगा। बता दें, चीन और पाकिस्तान के बीच परमाणु सहयोग 1986 से जारी है, लेकिन सितंबर 2021 में किया गया नया नया करार इसे नए आयाम देगा। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन का इस्तेमाल परमाणु हथियारों के निर्माण में करना कोई छिपी बात नहीं है। ऐसे में नए करार व चीन का बढ़ता सहयोग पाकिस्तान को खतरनाक हथियारों के निर्माण में मददगार बन सकता है। इससे स्वाभाविक रूप से भारत, दक्षिण एशिया व पूरी दुनिया को खतरा होगा।