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पहलगाम: न्यूयॉर्क टाइम्स ने आतंकियों को 'उग्रवादी' बताया, अमेरिकी संसदीय समिति की लताड़, कहा- अखबार सच से दूर

Thu, 24 Apr 2025 11:24 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ल डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।

सार

Pahalgam: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को उग्रवादी हमला बताने पर अमेरिकी कांग्रेस की विदेश मामलों की समिति ने न्यूयॉर्क टाइम्स को लताड़ लगाई है। दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी खबर में हमलावरों को उग्रवादी (मिलिटेंट्स) लिखा था। अमेरिकी सदन की विदेश मामलों की समिति ने इस शब्द को पूरी तरह से गलत करार दिया और कहा कि यह एक आतंकवादी हमला था।
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पहलगाम आतंकी हमले पर न्यूयॉर्क टाइम्स की आपत्तिजनक हेडलाइन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
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दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ा हुआ है। इस बीच, अमेरिका की विदेश मामलों की संसदीय समिति ने इस घटना से जुड़ी रिपोर्ट को लेकर एक अमेरिकी अखबार पर निशाना साधा है। 

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दरअसल, अमेरिकी अखबार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने 22 अप्रैल को 'कश्मीर में उग्रवादियों ने कम से कम 24 पर्यटकों की गोली मारकर हत्या कर दी' शीर्षक के साथ रिपोर्ट प्रकाशित की। इस पर अमेरिका की प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की संसदीय समिति आपत्ति जताई। इस समिति को 'हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी मेजोरिटी' कहा जाता है। रिपोर्ट के शीर्षक में आतंकवादी (टेररिस्ट) की जगह उग्रवादी (मिलिटेंट) शब्द का उपयोग किया गया था। समिति ने इस रिपोर्ट के शीर्षक का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा, 'सुनिए, न्यूयॉर्क टाइम्स, हमने आपके लिए आपकी गलती सुधार दी है। यह एक सीधा और स्पष्ट आतंकवादी हमला था। चाहे बात भारत की हो या इस्राइल की, जब बात आतंकवाद की होती है, तो न्यूयॉर्क टाइम्स वास्तविकता से दूर होता है।'
 


अखबार ने क्या-क्या लिखा, पढ़ें पूरी रिपोर्ट-
इस पूरी रिपोर्ट में आतंकवादी की जगह उग्रवादी शब्द का उपयोग किया गया है। रिपोर्ट में सरकार के अधिकारियों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा गया, 'भारतीय-प्रशासित कश्मीर क्षेत्र में मंगलवार को उग्रवादियों ने पर्यटकों के एक समूह पर गोलीबारी की, जिसमें कम से कम दो दर्ज लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए।' रिपोर्ट में आगे लिखा गया, 'यह हमला एक खूबसूरत हिमालयी जिले में हुआ, जहां देवदार के पेड़ों और घाटियों से ढके हुए इलाकों को भारतीय पर्यटक पसंद करते हैं और स्थानीय लोग इसे अक्सर 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहते हैं। जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के अनुसार यह क्षेत्र में वर्षों में नागरिकों पर हुआ सबसे गंभीर हमला था।'
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'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस हमले की निंदा करते हुए इसे 'आतंकी हमला' कहा और कहा कि 'जो इस घिनौने कृत्य के पीछे हैं, उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। मोदी ने सऊदी अरब से जल्दी लौटने का निर्णय लिया। राष्ट्रपति (डोनाल्ड) ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़ा है।'

57 वर्षीय बिनू भाई ने कहा, मंगलवार दोपहर जब पर्यटक नजारों का आनंद ले रहे थे, बंदूकधारियों ने झाड़ियों के पीछे से बिना किसी चेतावनी के गोलीबारी शुरू कर दी। बिरजू भाई के दोनों हाथों और पैरों में गोली लगी थी और उनका अस्पताल में उपचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जमीन पर लगभग एक दर्जन मृत शरीर देखे, उन्हें स्थानीय निवासियों द्वारा बचाया गया। चश्मदीदों के अनुसार, घायलों या मृत पर्यटकों के शवों को पहाड़ियों से घोड़े और वाहनों से नीचे लाया गया।

अधिकारिक मौतों का आंकड़ा जारी नहीं किया गया है और कोई समूह तुरंत इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ले पाया है। भारत और पाकिस्तान दोनों ने 1947 में विभाजन के बाद से इस क्षेत्र पर दावा किया है और सीमा पर झड़पों ने लंबे समय से अस्थिरता पैदा की है। हमला पहलगाम कस्बे से कुछ मील की दूरी पर बायसरान घाटी में हुआ, जहां केवल पैदल या घोड़े पर ही पहुंचा जा सकता है। घास के मैदानों से गुजरते हुए एक 20 मिनट का चढ़ाई रास्ता खुलता है, जो गर्मियों में अक्सर फूलों से सजा होता है, जिससे यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन जाता है।

पर्यटक कई भारतीय राज्यों से आए थे। हालांकि सभी की पहचान अभी जारी नहीं की गई है। टैक्सी चालक आदिल चापरी ने कहा कि जैसे ही देशभर में तापमान बढ़ने लगा, पर्यटक हिमालय क्षेत्र में आने लगे थे। उन्होंने कहा कि बायसरान में कुछ पर्यटकों को छोड़ने के लिए जब वह वाहन चला रहे थे, तो वहां 'भारी भीड़' थी। उन्होंने यह भी कहा कि एक होटल मालिक मित्र ने उन्हें हमले के बाद बताया कि जो पर्यटकों को घोड़े की सवारी कराते हैं, उन्होंने उन्हें और पर्यटकों को भेजने से मना कर दिया था।

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भारत और पाकिस्तान ने कश्मीर को लेकर तीन युद्ध लड़े हैं। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर मुस्लिम-बहुल क्षेत्र में अलगाववादी हिंसा भड़काने का आरोप लगाता रहा है। कई नागरिकों, जिनमें हिंदू तीर्थयात्री भी शामिल हैं, को आतंकवादी समूहों ने दशकों से मार डाला है। हाल के वर्षों में खूनखराबा कम हुआ है, जब मोदी ने 2019 में कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द कर दिया और उनकी सरकार ने दिल्ली से सीधे इस क्षेत्र का प्रशासन करना शुरू किया। भारतीय सरकार ने कश्मीर में भारी सुरक्षा बल तैनात किया है और वर्षों से वहां लोकतंत्र को निलंबित रखा है। मोदी सरकार ने कश्मीर में घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दिया है, जो कश्मीर को विकास की ओर ले जाने और वहां स्थिरता की छवि पेश करने के प्रयास का हिस्सा है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2018 में लगभग 17 मिलियन से बढ़कर 2023 में 22 मिलियन पर्यटक कश्मीर आए।

गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार शाम को श्रीनगर पहुंचे, जो क्षेत्रीय राजधानी है, ताकि सुरक्षा अधिकारियों से मिलकर स्थिति की समीक्षा कर सकें। जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सुरक्षा चूक की संभावना की जांच की मांग की। मुफ्ती ने एक्स पर पोस्ट किया, "पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोपरि है, और भविष्य में हमलों को रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।"  देशभर से अन्य राजनीतिक नेताओं ने भी अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस, जो अपनी पत्नी उषा वांस और तीन बच्चों के साथ भारत के चार दिन के दौरे पर हैं, ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 'हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं' भारतीय जनता के साथ हैं क्योंकि वे इस भयानक हमले के शोक में हैं।

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