पहलगाम हमले के बाद भारत पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को लेकर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने दोनों देशों से अपील की है। एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि दोनों देश आतंकी हमले के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए काम करें। उन्होंने कहा कि वे तनाव कम करने और बातचीत फिर से शुरू करने के लिए दोनों पक्षों को स्वीकार्य किसी भी पहल का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।
गुटेरेस के कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि महासचिव भारत और पाकिस्तान के बीच की स्थिति को लेकर बहुत चिंतित हैं। उन्होंने दोनों सरकारों से अधिकतम संयम बरतने और किसी भी तरह की तनातनी से बचने का आग्रह किया है। गुटेरेस ने कहा है कि मुद्दों को भी सार्थक और रचनात्मक बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जा सकता है।
गुटेरेस ने कहा कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति पर बहुत बारीकी से और चिंता के साथ नजर रख रहे हैं। उन्होंने दोनों सरकारों से अधिकतम संयम बरतने और यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि आगे मामला न बिगड़े। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमओजीआईपी) की हमला वाले क्षेत्र में कोई उपस्थिति नहीं है। गुटेरेस ने आतंकी हमले के पीड़ितों के परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त की और जवाबदेही और न्याय के महत्व को रेखांकित किया।
ये भी पढ़ें: क्या तुर्किये से मदद लेकर पाकिस्तान आया विमान? विदेश मंत्रालय ने दी सफाई, दोनों देशों से संयम की अपील
UNMOGIP अपनी उपयोगिता खो चुका: भारत
यूएनएमओजीआईपी की स्थापना जनवरी 1949 में हुई थी। 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध और उस वर्ष 17 दिसंबर के युद्ध विराम समझौते के बाद यूएनएमओजीआईपी का काम युद्ध विराम के सख्त पालन से संबंधित घटनाक्रमों पर नजर रखना और महासचिव को इस पर रिपोर्ट करना रहा है। वहीं भारत ने कहा है कि यूएनएमओजीआईपी अपनी उपयोगिता खो चुका है और शिमला समझौते और नियंत्रण रेखा (एलओसी) की स्थापना के बाद अप्रासंगिक हो गया है।
पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की थी। उन्होंने इस बात पर बल दिया था कि इन हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। निंदनीय आतंकवादी कृत्य के आयोजकों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें: अमेरिकी अखबार का दावा- सेना प्रमुख मुनीर ने कराया पहलगाम हमला, अब करारा जवाब देने की तैयारी में भारत
कब और कहां हुई आतंकी वारदात
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम शहर के निकट ‘मिनी स्विटरलैंड’ नाम से मशहूर पर्यटन स्थल पर मंगलवार दोपहर हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर पर्यटक हैं। यह 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद घाटी में हुआ सबसे घातक हमला है। एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि 26 मृतकों में दो विदेशी और दो स्थानीय निवासी हैं। हथियारबंद आतंकवादी 'मिनी स्विट्जरलैंड' में घुस आए और भोजनालयों के आसपास घूम रहे, खच्चर की सवारी कर रहे, पिकनिक मना रहे पर्यटकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। पाकिस्तान में स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के छद्म संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली है।
भारत ने लिए थे पांच कड़े फैसले
पहलगाम हमले के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम को नई दिल्ली में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक हुई और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। 1960 की सिंधु जल संधि पर रोक लगाने, अटारी में एकीकृत जांच चौकी को तत्काल प्रभाव से बंद करने का भी फैसला किया। यह घोषणा की गई कि दक्षेस वीजा छूट योजना (एसवीईएस) के तहत पाकिस्तानी नागरिकों को भारत की यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और पाकिस्तानी नागरिकों को अतीत में जारी किए गए ऐसे किसी भी वीजा को रद्द माना जाएगा।
संबंधित विहयो