मशहूर फिल्मकार पा रंजीत वेत्तुवम (द हॉन्टेड) फिल्म के साथ पहली बार कान फिल्म फेस्टिवल में शामिल हुए। तमिल सिनेमा में दलितों के बढ़ते दबदबे को आवाज देने वाले सरपट्टा परंबरई के निर्देशक इस साल के अंत में वेत्तुवम की शूटिंग शुरू करेंगे। यह फिल्म 2023 में रिलीज होनी है। बृहस्पतिवार को उन्होंने कान फिल्म फेस्टिवल में इसका पोस्टर पेश किया।
हिंदी में बिरसा मुंडा की बायोपिक बनाने पर भी काम कर रहे रंजीत कहते हैं, मुख्यधारा के सिनेमा में एक विशिष्ट सामाजिक चेतना को लगातार व्यक्त करना आसान नहीं है, लेकिन पहुंच और अपील के कारण यह सबसे अच्छा माध्यम है, जो उन समुदायों की कहानियों पर स्पॉटलाइट को लाता है, जिन्होंने सदियों से शोषण का सामना किया और हाशिए पर रहे।
रंजीत कहते हैं, वेत्तुवम असल में बताती है कि कैसे सत्ता पर काबिज लोग शेष समाज को दीनहीन बनाए रखते हैं और उन्हें हाशिए पर धकेल देते हैं। रंजीत की फिल्मों की कहानियों के जाति-विरोधी रुख से प्रभावित होने की वजह से तमिल सिनेमा में दस वर्षों में बहुत बदलाव हुआ। रंजीत कहते हैं कि दशकों की द्रविड़ राजनीति की वजह से तमिल समाज में जाति की जड़ें बहुत गहरी हैं। एक समय था, जब उन्होंने फिल्म की शुरुआत में भीमराव आंबेडकर की तस्वीर इस्तेमाल की तो उन्हें इसे हटाने तक की सलाह दी गई।
वेत्तुवम एक साधारण दिहाड़ी मजदूर चोलन की कहानी है, जो हालात से लड़ते हुए कुख्यात गैंगस्टर और एक आधुनिक रॉबिन हुड बनकर तमिलनाडु के पोन्नी इलाके पर नियंत्रण रखता है। वह अपने लोगों के लिए लड़ता है, जिसकी वजह से उसके कई दुश्मन बनते हैं, जब प्रतिद्वंद्वियों को पता चलता है कि चोलन समर्थकों की वजह से बहुत शक्तिशाली बन गया है तो वे उसे नीचे लाने के प्रयास में राज्य की शक्ति का उपयोग करते हैं।
सत्यजीत रे की फिल्म प्रतिध्वनि कान में प्रदर्शित
तेजी से बदलते शहर में नौकरी तलाशने वाले एक युवक की मुख्य भूमिका में धृतिमान चटर्जी के साथ 1970 में आई सत्यजीत रे की फिल्म प्रतिध्वनि को बृहस्पतिवार को 75वें कान फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया। सिनेमैटोग्राफर सुदीप चटर्जी ने फिल्म के मूल नेगेटिव से इसका पुनर्स्थापित संस्करण तैयार किया।
हालांकि, कान के बुनुएल हॉल में फिल्म के प्रदर्शन के दौरान चटर्जी और फिल्म की निर्माता पूर्णिमा दत्ता मौजूद नहीं थे। लोग फिल्म के पुनर्स्थापन के बारे में जानना चाहते थे। चटर्जी ने मुंबई से फोन कॉल के जरिये कहा कि पुनर्स्थापन की परियोजना से जुड़ना बेहद उत्साहजनक और गौरवपूर्ण था। नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय की तरफ से शुरू किए गए राष्ट्रीय फिल्म विरासत अभियान के तहत कई फिल्मों के पुनर्स्थापन की परियोजना शुरू की है, जिनमें से प्रतिध्वनि एक है।