कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर)
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कोरोना वायरस को अस्तित्व में आए पांच महीने से ज्यादा हो गए हैं और देश-विदेश में कोरोना की वैक्सीन के लिए काम चल रहा है। कई प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत कर वैक्सीन बनाने का काम कर रहे हैं। इसी सिलसिले में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन एजेडडी1222 का दूसरे और तीसरे चरण का ट्रायल जारी है, लेकिन कंपनी एक्स्ट्राजेनेका ने इसका उत्पादन शुरू कर दिया है। वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि वायरस के खिलाफ यह वैक्सीन कारगर होगी और अगस्त के अंत तक बाजार में आ जाएगी।
एक्स्ट्राजेनेका के चीफ एग्जीक्यूटिव पास्कल सोरियात ने बताया कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और जेनिफर इंस्टीट्यूट की वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर दिया गया है। उम्मीद है कि वह दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षा में सफल होगी। पहले चरण में 18 से 55 साल के 160 लोगों पर दवा के सकारात्मक परिणाम देखे गए हैं। दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण 10,000 लोगों का है जिनमें बच्चे और बड़े दोनों शामिल है।
वायरस कमजोर हुआ तो संभावना कम
जेनिफर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. एड्रियन हिल का कहना है कि वैक्सीन का ट्रायल पूरा होने तक अगर वायरस कमजोर पड़ता है या संक्रमण की दर घटती है तो इसके सफल होने की संभावना सिर्फ 50 फीसदी है। वहीं कंपनी का कहना है कि वैक्सीन की तीन करोड़ डोज तैयार करनी है। ब्रिटेन सरकार ने एक करोड़ वैक्सीन का ऑर्डर दिया है। सब कुछ सही रहा तो सितंबर से इसकी उपलब्धता शुरू हो जाएगी।