अमेरिका में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद दुनियाभर में दासता के प्रतीकों को हटाने के लिए अभियान ने जोर पकड़ लिया है। कई जगह प्रतिमाएं तोड़ दी गई हैं और कई ऐतिहासिक इमारतों को भी निशाना बनाया जा रहा है। सदियों से हो रहे नस्लीय भेदभाव के खिलाफ बोस्टन, न्यूयॉर्क, पेरिस, ब्रुसेल्स, लंदन जैसे कई शहरों में ऐतिहासिक प्रतिमाओं को तोड़ने की घटनाएं सामने आई हैं।
इस दौरान लंदन में विक्टोरियन साम्राज्यवादी सेसिल रोड्स की प्रतिमा को हटाने को लेकर भी जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इस विरोध को देखते हुए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा संचालित ओरियल कॉलेज ने भी अपने भवन पर लगी साम्राज्यवादी सेसिल रोड्स की प्रतिमा और किंग एडवर्ड स्ट्रीट पट्टिका को हटाने का समर्थन कर दिया है।
लेकिन इस प्रतिमा को हटाने के पहले एक जांच आयोग गठित की जाएगी। कॉलेज ने कहा कि जांच आयोग गठित करने के लिए सरकारी निकाय ने मतदान भी किया। कॉलेज ने आगे कहा कि लंबे समय के बहस के बाद हम इस तरह के निर्णय पर पहुंचे हैं और इसका प्रभाव ब्रिटेन और इसके आसपास क्षेत्रों पर पड़ेगा। कॉलेज ने आगे कहा कि जांच के लिए गठित आयोग रोड्स की विरासत के साथ-साथ स्नातक, स्नातक छात्रों और फैकल्टी की पहुंच और उपस्थिति में सुधार के मुद्दे से निपटेगा, साथ ही साथ कॉलेज की 21 वीं शताब्दी की समीक्षा भी करेगा।
बता दें कि वर्ष 2016 से ही रोड्स मस्ट फॉल का नारा बुलंद करके इसे हटाने के लिए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन अब तक जारी है। इस दौरान विभिन्न देशों के कॉलेज परिसरों और सड़कों पर नस्लवाद, साम्राज्यवाद और दास व्यापार के प्रतीकों को हटाने के लिए प्रदर्शनकारियों द्वारा जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन को और प्रभावशाली बनाने के लिए ब्लैक लाइव्स मैटर (बीएलएम) अभियान की शुरूआत की गई थी।
इस अभियान के दौरान नुकसान से बचाने के लिए प्रतिमा के चारों ओर एक तार की जाली लगाई गई थी। उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद में रोड्स और उनकी पृष्ठभूमि को आधुनिक समय में एक अवांछित प्रतीक के रूप में देखा जाता है। जानकारी के अनुसार रोड्स ने ऑक्सफोर्ड को बड़ी रकम दान की थी जिसमें भारत सहित दुनिया भर के कई उज्ज्वल छात्रों को प्रदान की जाने वाली रोड्स छात्रवृत्ति भी शामिल है।