नेपाल में अचानक आई बाढ़ से 32 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। इससे सड़कें, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान पहुंचा है। सरकार की शुरुआती रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को जारी की गई।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण यानी एनडीआरआरएमए ने यह रिपोर्ट तैयार की है। प्राधिकरण ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में रिपोर्ट पेश की।
बाढ़ में मरने वालों की संख्या कितनी हुई?
अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 1,295 हो गई। प्रभावित इलाकों से और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़ी है।
नेपाल में इतनी तबाही कैसे हुई?
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा अचानक नीचे गिरा था। इसके बाद अचानक बाढ़ आ गई। इस बाढ़ ने नेपाल के उत्तरी और मध्य हिस्सों के शहरों और गांवों में भारी तबाही मचाई। कई इलाकों में बाढ़ के बाद बड़ी तबाही का मंजर देखने को मिला। सरकार की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, 32,933 लोग प्रभावित हुए हैं। शिक्षण संस्थानों को हुए नुकसान से 6,500 से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं।
कितने अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान?
बाढ़ प्रभावित इलाकों में चार स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। तीन अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
कितनी सड़कें और पुल टूटे?
करीब 55 किलोमीटर सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। इन सड़कों पर वाहनों की आवाजाही होती थी। इसके अलावा 37 ऐसे पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए, जिनसे वाहन गुजरते थे। 68 झूला पुलों को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, नुकसान का विस्तृत आकलन अभी पूरा नहीं हुआ है।
सरकार पर क्या आरोप लगा?
इस बीच नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन नरसिंह केसी ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने बचाव और राहत अभियान के तालमेल में कमी का आरोप लगाया। केसी प्रतिनिधि सभा के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि बचाव और राहत के काम में तालमेल की गंभीर कमी रही। उन्होंने लंबे समय की योजना में भी कमी बताई। हालांकि, उन्होंने नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन बलों ने खोज और बचाव के काम में अहम भूमिका निभाई।
बाढ़ से कितना नुकसान होने का दावा?
केसी ने दावा किया कि इस आपदा से 800 अरब रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने आपदा के बाद जरूरतों का आकलन करने के लिए तेजी से कदम नहीं उठाया।
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राहत के लिए क्या मांग की गई?
केसी ने सरकार से सभी दलों की एक व्यवस्था बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे राहत सामग्री का वितरण ज्यादा प्रभावी और सभी लोगों को साथ लेकर किया जा सकेगा। उन्होंने राहत और पुनर्वास के काम की निगरानी के लिए उच्चस्तरीय संसदीय समिति बनाने की भी मांग की।
नेपाल ने जलवायु न्याय की मांग क्यों की?
केसी ने सरकार से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु न्याय का मुद्दा उठाने को कहा। उन्होंने कहा कि नेपाल जैसे देशों को मुआवजा दिलाने की कोशिश होनी चाहिए। ऐसे देश जलवायु परिवर्तन के असर के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं।
केसी ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की पहले की चेतावनियों का भी जिक्र किया। गुटेरेस ने नेपाल पर जलवायु परिवर्तन के असर को लेकर चेतावनी दी थी। केसी ने कहा कि इस आपदा ने एक बार फिर जलवायु अन्याय के मुद्दे को सामने ला दिया है।