ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैश और लश्कर जैसे संगठनों में भर्ती 30-40% तक घट गई है। अब आएसआई ने नई रणनीति अपनाई है, जिसमें विचारधारा नहीं बल्कि पैसे का लालच देकर युवाओं को जोड़ा जा रहा है।
दुनियाभर में कटोरा लेकर घूम रहा पाकिस्तान अभी तक ऑपरेशन सिंदूर की करारी मार से उबर नहीं पा रहा है। इसका बड़ा कारण है कि भारतीय सेना की कार्रवाई ने आतंकवाद के ढांचे को बड़ा झटका दिया है, जिसका सीधा असर आतंकी संगठनों की भर्ती पर पड़ा है। पहले जहां जैश और लश्कर जैसे संगठनों में आसानी से भर्ती होती थी, अब इसमें भारी गिरावट आई है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान अब नई रणनीति के तहत युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हालात पहले जैसे नहीं रहे हैं।
रिपोर्टस बताती हैं कि इससे पहले जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी समूहों में भर्ती आसानी से हो जाती थी। हालिया खुफिया आकलन के मुताबिक, इन समूहों में भर्ती अब लगभग 30-40 प्रतिशत कम हो गई है। इससे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अपनी रणनीति बदल दी है। अब भर्ती धर्म या विचारधारा नहीं, बल्कि पैसे के लालच पर ज्यादा आधारित है।
घर्म, जाती नहीं पैसे की लालच दे रहा आईएसआई
खुफिया सूत्रों के अनुसार, अब आईएसआई पैसे और बेहतर जीवनशैली की लालच देकर युवाओं को आकर्षित कर रही है। इसका मुख्य निशाना छात्र और पैसे की जरूरत वाले लोग हैं, लेकिन हाल की जांच में यह भी पता चला कि अधिकतर लोग उच्च जीवन स्तर और विलासिता के लिए भर्ती हो रहे हैं।
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