प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को इस्राइली सेना द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन राइजिंग लायन को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि इस्राइल ईरान में बैलिस्टिक मिसाइलों और परमाणु कार्यक्रम के खतरों को दूर करने के अपने लक्ष्यों के बहुत करीब है।
नेतन्याहू ने रविवार को तेल अवीव में इस्राइली पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम जरूरी कामों को करते रहेंगे, लेकिन जल्बाजी में कुछ खत्म नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि जब हमारे मकसद पूरे हो जाएंगे, तब ऑपरेशन राइजिंग लायन बंद कर दिया जाएगा और लड़ाई भी खत्म हो जाएगी।
हमें मिटाना चाहता है ईरान
नेतन्याहू ने आगे कहा कि मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि ईरान की सरकार हमें मिटा देना चाहती है। इसलिए हमने अपने अस्तित्व के लिए दो ठोस खतरों को खत्म करने के लिए ऑपरेशन राइजिंग लायन की शुरुआत की, इन खतरों में परमाणु खतरा और बैलिस्टिक मिसाइल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हम धीरे-धीरे इन खतरों को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हम उन्हें पूरा करने के बहुत करीब हैं।
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अमेरिका ने चीन से ईरान को समझाने की अपील की
इस बीच, अमेरिका ने चीन से अपील की है कि वह ईरान को समझाए कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद न करे। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार को बयान देते हुए कहा कि अगर ईरान यह जलमार्ग बंद करता है, तो इससे पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। मार्को रुबियो ने कहा कि, 'चीन की ईरान के साथ करीबी बातचीत है, और हम उम्मीद करते हैं कि वह इस स्थिति को शांत करने में मदद करेगा।' अमेरिका की यह अपील ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में टकराव का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य?
यह जलमार्ग फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच मौजूद है। दुनिया का लगभग 30% तेल यहीं से होकर गुजरता है। अगर यह बंद होता है, तो वैश्विक तेल कीमतों और सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। वहीं इस्राइल से तनाव और अमेरिकी हमले के बीच ईरान की तरफ से लगातार इसे बंद करने की धमकी से वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा गहराया है।
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रूस ने अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की
रूस ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर अमेरिका की तरफ से किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। इन हमलों को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। रूसी विदेश मंत्रालय ने आगे बयान में कहा कि किसी भी तर्क के आधार पर एक संप्रभु देश की जमीन पर मिसाइल और बमबारी करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। खासकर तब, जब ये हमला उस देश ने किया हो जो खुद यूएन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है।
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