सार
परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव के बीच इस्राइल ने ईरान पर जोरदार हमला कर पूरी दुनिया में चर्चा तेज कर दी है। इस्राइल ने ईरान के पश्चिमी क्षेत्र में वायु रक्षा सिस्टम पर हमला कर नाभिकीय ठिकानों, राडार और मिसाइल लॉन्चर तबाह किए। साथ ही नटांज नाभिकीय स्थल को निशाना बनाया गया। हां इन सबमें एक सवाल ये भी खड़ा होता है कि आखिर इस हमले में मोसाद की क्या भूमिका रही है? आइए इस बात को समझते है...
परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव के बीच इस्राइल ने शुक्रवार को ईरान के पश्चिमी क्षेत्र में उसके वायु रक्षा सिस्टम पर जोरदार हमला कर अपनी मंशा साफ कर दी। हमले के बाद इस्राइल की सेना (आईडीएफ) ने वीडियो भी जारी किया, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे उसके एयर फोर्स के विमान ने नाभिकीय ठिकानों, सैन्य कमांडरों और सैनिकों को निशाना बनाकर दर्जनों राडार और सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल लॉन्चर तबाह किए।मामले में इस्राइली वार रूम के बयान में कहा गया कि यह हमला न केवल ईरान की रक्षा प्रणालियों को कमजोर करने के लिए, बल्कि क्षेत्र में उसके प्रॉक्सी समूहों पर भी लगातार किया जा रहा है।
कहां-कहां हुए हमले?
मामले में इस्राइली सेना ने कहा कि उन्होंने ईरान के विभिन्न इलाकों में कई सैन्य और नाभिकीय ठिकानों पर हमला किया है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने पुष्टि की है कि नटांज नाभिकीय स्थल को निशाना बनाया गया है। ब्रिगेडियर जनरल एफी डैफरिन ने बताया कि ईरान ने इस्राइल की ओर लगभग 100 ड्रोन भेजे, जिन्हें इस्राइल ने इंटरसेप्ट कर मार गिराया। बयान में ये भी कहा गया कि इस हमले ने इस्राइली एयर फोर्स की हवाई संचालन की स्वतंत्रता बढ़ा दी है।
अब समझिए क्या है मोसाद की भूमिका?
अब बात अगर इस तकरार में जासूसी एजेंसी ईरान पर हमले से पहले इस्राइल ने तेहरान में ड्रोन व अन्य हथियार गोपनीय ढंग से भेजे। इन्हें हवाई हमलों के साथ लॉन्च किया। इस्राइली अधिकारियों ने कहा, देश की जासूसी एजेंसी (मोसाद) ने शुक्रवार के हमलों से पहले ईरान में हथियारों को तस्करी करके अंदर तक पहुंचा दिया था। इस मिशन को अति गोपनीय रखा गया।
अधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि इन हथियारों में ड्रोन और विस्फोटक हथियार शामिल थे, जिन्हें लॉन्चिंग के लिए एक बेस पर स्थापित किया गया और शुक्रवार के हमले के दौरान तेहरान के पास एक ईरानी बेस पर मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन सक्रिय कर दिए गए। उन्होंने कहा, इस्राइल ने मध्य ईरान में सटीक हथियारों की तस्करी भी की थी और उन्हें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों के पास तैनात किया। उसने वाहनों पर स्ट्राइक सिस्टम भी तैनात किए।
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हमले में हुए बड़े नुकसान
इस्राइल की तरफ से पुष्टि हुई है कि उनके फाइटर जेट्स ने सीधे इस्राइल की ओर लक्षित बैलिस्टिक मिसाइलों को भी नष्ट किया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर-इन-चीफ हुसैन सलामी इस हमले में मारे गए हैं। साथ ही हमले में कई बच्चों के मारे जाने की भी खबरें हैं।
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पीएम नेतन्याहू का बयान
वहीं इस मामले में इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि यह हमला देश की सुरक्षा के लिए जरूरी था और इसका मकसद ईरान से गंभीर खतरे को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि हमने नटांज के मुख्य यूरेनियम समृद्धिकरण केंद्र को निशाना बनाया। हमने ईरान के उन शीर्ष नाभिकीय वैज्ञानिकों को भी हमला किया जो बम बनाने में लगे थे। साथ ही, हमने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम के केंद्र पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन कई दिनों तक जारी रह सकता है ताकि पूरी तरह से खतरे को समाप्त किया जा सके।