फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

OpenAI Controversy: ओपनएआई के खिलाफ एलन मस्क की बड़ी हार, कोर्ट ने खारिज किया मुकदमा; जानिए क्या है पूरा मामला

Tue, 19 May 2026 02:33 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

Federal Court Decision: एलन मस्क को अमेरिकी अदालत से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने ओपनएआई और सैम ऑल्टमैन के खिलाफ उनका मुकदमा खारिज कर दिया है। जूरी के मुताबिक, मस्क ने शिकायत दर्ज कराने में कानूनी समय सीमा पार कर दी। मस्क ने आरोप लगाया था कि ओपनएआई मुनाफा कमाने में लग गई है। वहीं, ओपनएआई ने इसे मस्क की व्यावसायिक दुश्मनी और उनकी कंपनी एक्स(एआई) को फायदा पहुंचाने की चाल बताया। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...
विज्ञापन
मस्क की बड़ी हार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क को अमेरिकी फेडरल कोर्ट से एक बहुत बड़ा झटका लगा है। कैलिफोर्निया के ऑकलैंड की एक संघीय अदालत ने मस्क द्वारा एआई कंपनी ओपनएआई और उसके शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ दायर किए गए बड़े मुकदमे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। मस्क ने अदालत में आरोप लगाया था कि चैटजीपीटी बनाने वाली इस कंपनी ने मानवता की भलाई के लिए काम करने के अपने मूल उद्देश्य को धोखा दिया है और अब यह केवल पैसा कमाने वाली कंपनी बन गई है।

विज्ञापन


नौ सदस्यों वाली जूरी ने तीन सप्ताह तक चले इस लंबे ट्रायल के बाद अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जूरी ने दो घंटे से भी कम समय तक विचार करने के बाद अदालत को बताया कि मस्क ने यह मुकदमा दायर करने में बहुत ज्यादा देर कर दी है और उन्होंने कानूनी समय सीमा (स्टैच्यूटरी डेडलाइन) को पार कर लिया है। जज यवोन गोंजालेज रोजर्स ने सोमवार को जूरी के इस फैसले को अदालत के अंतिम फैसले के रूप में स्वीकार कर लिया और मस्क के दावों को खारिज कर दिया। हालांकि, मस्क के वकील स्टीवन मोलो ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने इस हार की तुलना अमेरिकी इतिहास की पुरानी जंगों से की और कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ अदालत में अपील जरूर करेंगे।

ये भी पढ़ें- 'इस बार खाड़ी देशों की अपील पर रुके': ट्रंप ने टाला ईरान पर हमला, कहा- समझौता करो वरना हमले के लिए तैयार रहो
विज्ञापन


मस्क और ओपनएआई के बीच इस बड़े विवाद की असली वजह क्या?
इस विवाद की जड़ें ओपनएआई की शुरुआत से जुड़ी हैं। साल 2015 में मस्क ने ओपनएआई की सह-स्थापना की थी और शुरुआती वर्षों में इस प्रोजेक्ट में लगभग 3.8 करोड़ डॉलर का बड़ा निवेश भी किया था। मस्क का सीधा आरोप है कि ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और उनके शीर्ष सहयोगी ग्रेग ब्रॉकमैन ने उनके पीठ पीछे कंपनी को मुनाफा कमाने वाली मशीन में बदल दिया। मस्क चाहते थे कि ओपनएआई हमेशा एक गैर-लाभकारी (नॉन-प्रॉफिट) संस्था बनी रहे। अदालत में सुनवाई के दौरान ग्रेग ब्रॉकमैन ने खुद यह खुलासा किया कि ओपनएआई में उनकी हिस्सेदारी करीब 30 अरब डॉलर की है। वहीं, सैम ऑल्टमैन और ओपनएआई ने दलील दी कि कंपनी को हमेशा गैर-लाभकारी बनाए रखने का कोई पक्का वादा कभी नहीं किया गया था।

ओपनएआई ने अदालत में बचाव करते हुए मस्क पर क्या बड़े आरोप लगाए?
अदालत में ओपनएआई के वकीलों ने मस्क के सभी दावों को सिरे से नकारते हुए कहा कि यह मुकदमा सिर्फ एक व्यावसायिक दुश्मनी का नतीजा है। कंपनी का साफ कहना है कि मस्क इस तेजी से बढ़ती एआई कंपनी (जिसकी वैल्यू अब 852 अरब डॉलर आंकी जा रही है) पर अपना एकतरफा नियंत्रण चाहते थे। जब मस्क को यह कंट्रोल नहीं मिला, तो उन्होंने यह मुकदमा कर दिया। ओपनएआई के वकील विलियम सविट ने कहा कि मस्क का असली मकसद ओपनएआई के तेजी से होते विकास को रोकना है। असल में, मस्क अपनी खुद की एआई कंपनी 'एक्सएआई' को फायदा पहुंचाना चाहते हैं, जिसे उन्होंने साल 2023 में ओपनएआई के प्रतिद्वंद्वी के रूप में लॉन्च किया था।
 

पक्ष का नाम अदालत में मुख्य दावा और दलील
एलन मस्क ओपनएआई ने एक चैरिटी को चुराया है और मुनाफा कमाने के लिए अपने मूल मिशन को धोखा दिया है।
ओपनएआई (सैम ऑल्टमैन) मस्क कंपनी पर एकतरफा कंट्रोल चाहते थे, मुकदमा प्रतिद्वंद्वी कंपनी xAI को फायदा पहुंचाने की चाल है।
कोर्ट और जूरी मस्क ने मुकदमा दायर करने में बहुत देरी की और कानूनी समय सीमा (डेडलाइन) पार कर दी।

विज्ञापन

सैम ऑल्टमैन ने अपनी गवाही में मस्क के बारे में क्या अहम खुलासे किए?
मुकदमे की सुनवाई के दौरान ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने अदालत को बताया कि शुरुआती दिनों में वह मस्क का बहुत ज्यादा सम्मान करते थे। लेकिन, ऑल्टमैन ने कहा कि मस्क ने अपने वादे पूरे नहीं किए और कंपनी को एक बहुत ही मुश्किल स्थिति में अकेला छोड़ दिया था। ऑल्टमैन ने कहा कि मस्क को उन चीजों की परवाह नहीं थी, जो कंपनी के मूल मिशन के लिए बहुत जरूरी थीं। ऑल्टमैन का मानना है कि 'आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस' (एजीआई) जैसी शक्तिशाली और इंसानों से बेहतर तकनीक कभी भी किसी एक व्यक्ति के नियंत्रण में नहीं होनी चाहिए, चाहे उसके इरादे कितने भी अच्छे क्यों न हों। सह-प्रतिवादी और बड़े निवेशक के रूप में माइक्रोसॉफ्ट ने भी अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है और ओपनएआई के साथ काम जारी रखने की बात कही है।

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें