सात जनवरी की सीडीसी ने कोरोना वायरस को लेकर एक इंसिडेंट मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया। चीनी वैज्ञानिकों द्वारा कोरोना का जेनेटिक सिक्वेंस साझा करने के दो हफ्ते बाद 20 जनवरी तक सीडीसी ने अपना पहला टेस्ट किट तैयार कर लिया था। हालांकि जिस वक्त जांच की सबसे ज्यादा जरूरत थी तकनीकी खामियों की वजह से इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सका।
एफडीए बना बाधा
एफडीए अमेरिका में शोधकर्ताओं और डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरा। कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के मुताबिक, शोधकर्ताओं और डॉक्टरों ने कोविड-19 का पता लगाने के लिए
तेजी से टेस्ट करने शुरू कर दिए थे लेकिन एफडीए की मंजूरी प्रक्रिया उनकी राह में रुकावट डाल रही थी। इस दौरान नए टेस्ट किट देशभर में बिना इस्तेमाल किए पड़े रहे।
भरोसे की कमी
फरवरी में गहराते संक्रमण को लेकर अमेरिकियों में गुस्सा फूटने लगा। इस दौरान सारा ध्यान स्वास्थ्य एवं मानव सेवा (एचएचएस) सचिव पर आ टिका। उनके विभाग और अधिकारियों की जमकर आलोचना होने लगी। 27 फरवरी को एफडीए और एचएचएस के बीच बैठकें हुईं। इसके बाद तेजी से जांच का दायरा बढ़ाया।
फरवरी में होने चाहिए थे ज्यादा से ज्यादा टेस्ट
फरवरी के मध्य तक अमेरिका में प्रतिदिन महज 100 लोगों की ही जांच हो पा रही थी। डॉ. नुज्जो ने बताया कि अगर फरवरी में ही अधिक जांच हो जातीं तो अमेरिका आज विकट परिस्थिति में नहीं फंसता।
फरवरी के अंत तक इसके दुष्परिणाम भी आने लगे, जब सिएटल में पहली बार बिना विदेश यात्रा किए और संक्रमण के स्रोत से अनभिज्ञ व्यक्ति में कोरोना का संक्रमण मिला। शोधकर्ताओं ने पाया कि वायरस लगातार हफ्तों तक फैल रहा था लेकिन स्वास्थ्य महकमा नाकाम रहा।