दक्षिण कोरिया का कॉस्मेटिक उद्योग गहरे संकट में फंस गया है। बाजार के जानकारों का कहना है कि दुनिया भर के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने इस उद्योग पर कोरोना महामारी की बहुत तगड़ी मार पड़ी है। महामारी के कारण लोगों की जीवन शैली में आए बदलाव की वजह से सौंदर्य प्रसाधनों की बिक्री में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है।
कोरियाई उद्योगों का अध्ययन करने वाली एजेंसी सैमजोंग केपीएमजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2010 से 2014 के बीच विदेशी कंपनियों के बीच दक्षिण कोरियाई कॉस्मेटिक कंपनियों को खरीदने की होड़ लगी रही थी। इस दौरान इन कंपनियों ने इस क्षेत्र में साढ़े 21 करोड़ डॉलर का निवेश किया। उस दौर में कोरिया में बने कॉस्मेटिक्स को दुनिया भर के बाजारों में ले जाया गया।
सैमजोंग केपीएमजी के मुताबिक 2014 से 2019 तक दक्षिण कोरिया कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का दुनिया में चौथा सबसे बड़ा निर्यातक बना रहा। इन उत्पादों के निर्यात से इन वर्षों में 5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आई। इस दौरान एस्टी लॉडर कंपनीज इन्स और गोल्डमैन सैक्स जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने दक्षिण कोरिया के कॉस्मेटिक उद्योग में निवेश किए।
गोल्डमैन सैक्स ने जीपी क्लब कंपनी में निवेश किया, जिसकी वजह से इसके मालिक किम जंग वूंग दक्षिण कोरिया के सबसे धनी व्यक्तियों में एक हो गए। यूनिलिवर पीसीएल, एल’ओरियल एसए, और दूसरी मशहूर बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भी इस दौर में दक्षिण कोरियाई कॉस्मेटिक कंपनियों में पैसा लगाया।
लेकिन कोरोना महामारी ने दक्षिण कोरिया के सौंदर्य कारोबार पर जबरदस्त चोट की है। सोशल डिस्टेंसिंग और वर्क फ्रॉम होम के कारण सौंदर्य प्रसाधनों की मांग घट गई है। इस कारण इन प्रोडक्ट्स को बचने वाले बहुत से स्टोर बंद हो गए हैं। अमेरिका में ब्यूटी प्रोडक्ट्स की खुदरा बिक्री में इस साल सात फीसदी गिरावट आई है। महामारी के पहले अमेरिका दक्षिण कोरियाई उत्पादों का तीसरा सबसे बड़ा बाजार था।
कोविड-19 महामारी के कारण दक्षिण कोरिया आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी भारी गिरावट दर्ज हुई। खासकर यहां चीन के पर्यटक आते थे, जो यहां के टैक्स फ्री सामान बड़ी मात्रा में खरीदते थे। उनमें से बहुत से पर्यटक यहां से सामान लेकर जाकर अपने देश में बेचते थे। लेकिन महामारी के बाद चीन में देसी उत्पादन पर जोर दिया गया है। इसलिए बाहर से मंगवाए जाने कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स की मांग भी वहां घट गई है। सियोल स्थित एबेस्ट इन्वेस्टमेंट एंड सिक्युरिटीज कंपनी से जुड़ी विश्लेषक लीना ओह ने एक अखबार से कहा- अब ये सोचना भोलापन ही है कि दक्षिण कोरियाई ब्रांड फिर से चीनी ग्राहकों में लोकप्रिय हो जाएंगे।
केप इन्वेस्टमेंट एंड सिक्युरिटीज कंपनी की विश्लेषक हे-मी किम ने कहा है कि कोविड महामारी के कारण कॉस्मेटिक वस्तुओं पर लोगों के खर्च में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि लोग सिर्फ स्किन केयर (त्वचा की देखभाल) या फेशियल समस्याओं के इलाज वाले बेहद जरूरी प्रोडक्ट्स पर ही पैसा खर्च कर रहे हैं। दरअसल, दूसरी रिपोर्टों में बताया गया है कि लोगों का ध्यान इस समय दूसरी वस्तुओं पर है। दक्षिण कोरिया में एंटी-बॉडी विकसित करने का दावा करने वाले प्रोडक्ट्स की बिक्री हाल के महीनों में तेजी से बढ़ी है। इस कारण सेलट्रियॉन जैसी फार्मा कंपनियों की आमदनी में भारी उछाल देखा गया है।
इसके अलावा एक नया ट्रेंड ऑनलाइन ब्यूटी इंडस्ट्री का है। कॉस्मेटिक उद्योग की बड़ी कंपनी एल’ओरियल ने सौंदर्य की ट्रेनिंग वाली डिजिटल सेवा शुरू की है। उसने ऐसी कुल 300 सेवाएं शुरू की हैं। इस कंपनी की बिक्री में इस साल की पहली छमाही में 12 फीसदी गिरावट आई थी। लेकिन अब उसे उम्मीद है कि डिजिटल सेवाओँ से वह अपने घाटे की काफी हद तक भरपाई कर लेगी।