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जर्मनी : कट्टरपंथ को रोकने के लिए मौलवियों को प्रशिक्षण, इस्लाम कॉन्फ्रेंस ने उठाई जिम्मेदारी

Wed, 11 Nov 2020 11:34 AM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
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Germany
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साल 2006 में जर्मन इस्लाम कॉन्फ्रेंस की स्थापना की गई थी, इसका मुख्य उद्देश्य देश के मुस्लिम समुदायों के साथ नियमित तौर पर संवाद करना था। जर्मनी में लगभग 40 लाख मुसलमान रहते हैं और ये सब अलग-अलग देशों से आते हैं। अलग-अलग समुदाय होने की वजह से सभी की मस्जिदें नहीं है और जो मस्जिदें हैं उनमें काम करने वाले इमामों का प्रशिक्षण दूसरे देशों में होता रहा है।

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बता दें कि जर्मनी के प्राथमिक स्कूलों में ईसाई धार्मिक शिक्षा दी जाती है लेकिन इसका आधार कैथोलिक और इवांजेलिक संगठनों के साथ सरकार का समझौता है। जर्मन इस्लाम कॉन्फ्रेंस की स्थापना के बाद राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम प्रतिनिधियों के साथ सरकारी प्रतिनिधियों की बैठक के अलावा जरूरी मुद्दों पर चर्चा होती रही है। 

यहां स्कूलों में धार्मिक शिक्षा के अलावा इस्लामी धर्मशास्त्र की पढ़ाई और इमामों की ट्रेनिंग भी शामिल है। मुस्लिम कॉन्फ्रेंस का यह उद्देश्य है कि धार्मिक मामलों में सलाह देने वाले मौलवियों को प्रशिक्षण देना होता है। भारत के जफर खान मुस्लिम कॉन्फ्रेंस के इस कदम को महत्वपूर्ण मानते हैं। 
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जफर खान जर्मनी में एक बिजली कंपनी में काम करते हैं और उनका मानना है कि बच्चों के लिए उनके पुरखों के धर्म के बारे में जानना जरूरी है। भारतीय मुस्लिमों की संख्या पर्याप्त ना होने की वजह से परिवारों को अपने बच्चों को तुर्क मौलवियों के पास भेजना होता था।

इसके अलावा ओसनाब्रुक शहर में इमामों के प्रशिक्षण के लिए इस्लाम कॉलेज की शुरुआत की गई है। वहां स्वतंत्र इमाम प्रशिक्षण का एक प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। अप्रैल 2021 से इस कॉलेज में इमाम, मौलवियों और समुदायिक सलाहकारों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इमाम का प्रशिक्षण पाने के लिए न्यूनतम योग्यता इस्लामिक धर्मशास्त्र में बैचलर की डिग्री है।

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